Edited By Harman, Updated: 02 Mar, 2026 03:57 PM

Chirag Paswan News : केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में लागू एक दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने के लिए खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
Chirag Paswan News : केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में लागू एक दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने के लिए खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।
पटना में संवाददाताओं से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा कि यह आकलन किया जाना चाहिए कि जिस उद्देश्य से कानून लागू किया गया था, क्या वह पूरा हो रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, "यह समीक्षा जरूरी है कि जिन उद्देश्यों के साथ कानून बनाया गया था, वे पूरे हो रहे हैं या नहीं। यदि नहीं, तो कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाना चाहिए।" पासवान ने स्पष्ट किया कि समीक्षा की बात को शराबबंदी हटाने की वकालत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब हम समीक्षा की बात करते हैं तो अक्सर यह गलतफहमी हो जाती है कि हम शराबबंदी समाप्त करने की बात कर रहे हैं। मेरा मानना है कि किसी भी योजना को समय के साथ बेहतर बनाने के लिए उसकी निरंतर समीक्षा आवश्यक है।"
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पासवान ने कहा कि वह मद्यपान पर नियंत्रण के प्रयासों का पूरा समर्थन करते हैं क्योंकि नशे की लत परिवार और समाज दोनों के लिए घातक है। उन्होंने याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सरकार ने शराबबंदी लागू की थी, तब उनकी पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए भी इस कदम का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, "शराब के सेवन और निर्माण पर रोक लगाने का विचार सामाजिक दृष्टि से उचित है।" हालांकि, पासवान ने जहरीली शराब के सेवन से समय-समय पर होने वाली मौतों और राज्य में शराब की कथित 'होम डिलीवरी' के आरोपों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "अक्सर जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती रहती हैं। यदि ऐसी घटनाएं अब भी हो रही हैं, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं जहरीली शराब का निर्माण हो रहा है।" पासवान ने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए कानून के क्रियान्वयन तंत्र की व्यापक समीक्षा आवश्यक है ताकि खामियों को दूर कर इसके उद्देश्य को सुनिश्चित किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लोजपा (रामविलास) के विधायक माधव आनंद ने भी शराबबंदी नीति की समीक्षा की मांग की थी। हालांकि, जद(यू) नेताओं ने कानून पर पुनर्विचार की संभावना से इनकार किया है, जबकि भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर अब तक मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।