पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने किया आत्मसमर्पण, कोर्ट ने दी जमानत... जानिए क्या है मामला

Edited By Ramanjot, Updated: 28 Jun, 2022 09:59 AM

former chief minister jitan ram manjhi surrenders

विशेष अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आदिदेव की अदालत में आत्मसमर्पण और जमानत याचिका दाखिल कर जीतन राम मांझी की ओर से कहा गया कि इस मामले के आरोप की धाराएं जमानती हैं और मांझी पूर्व से पुलिस द्वारा दी गई जमानत पर हैं और उन्होंने जमानत का दुरुपयोग नहीं...

पटनाः प्रतिबंधित क्षेत्र में जुलूस निकालने और मार्ग अवरुद्ध करने के एक मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने सांसदों एवं विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिए पटना में गठित एक विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया, जहां बाद में उन्हें जमानत पर मुक्त कर दिया गया।

विशेष अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आदिदेव की अदालत में आत्मसमर्पण और जमानत याचिका दाखिल कर जीतन राम मांझी की ओर से कहा गया कि इस मामले के आरोप की धाराएं जमानती हैं और मांझी पूर्व से पुलिस द्वारा दी गई जमानत पर हैं और उन्होंने जमानत का दुरुपयोग नहीं किया है। मांझी की ओर से उन्हें जमानत पर मुक्त करने की प्रार्थना की गई थी। प्रार्थना स्वीकार करते हुए अदालत ने मांझी को 10 हजार रुपए के निजी मुचलके के साथ उसी राशि के एक जमानतदार का बंध-पत्र (बॉन्ड पेपर) दाखिल करने पर जमानत पर मुक्त किए जाने का आदेश दिया। मामला वर्ष 2020 का है।

आरोप के अनुसार, 29 जनवरी 2020 को अलग-अलग राजनीतिक पाटिर्यों के सैकड़ों लोगों ने एनआरसी और सीएए के विरोध में पटना के डाकबंगला चौराहे पर जुलूस की शक्ल में इकट्ठा होकर मार्ग को अवरुद्ध कर दिया एवं आवागमन ठप कर दिया था जिसमें जीतनराम मांझी के अलावा अन्य नेता भी शामिल थे। पुलिस ने इस मामले की प्राथमिकी कोतवाली थाना कांड संख्या 83/2020 के रूप में भारतीय दंड विधान की धारा 147, 148, 149, 188, 341, 342, 323, 504 और 506 के तहत दर्ज की थी। मामले में अनुसंधान के बाद पुलिस ने मांझी समेत 10 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

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