कटिहार में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले की जांच जारी, ‘हिरासत में मौत' के बाद भड़की थी भीड़

Edited By Ramanjot, Updated: 18 Sep, 2022 02:14 PM

the investigation into the attack on policemen in katihar continues

जानकारी के मुताबिक, 40 वर्षीय प्रमोद कुमार सिंह की कथित तौर पर हिरासत में मौत होने की खबर आने के बाद थाने पहुंचे ग्रामीणों ने विरोध में तोड़फोड़ की और परिसर में रखे वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रमोद सिंह को शुक्रवार को कथित तौर पर शराब की...

कटिहारः बिहार के कटिहार जिले में ग्रामीणों द्वारा दो थाना प्रभारियों सहित सात पुलिस कर्मियों पर किए गए हमले की जांच राज्य पुलिस कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति की कथित तौर पर हिरासत में हुई मौत के बाद ग्रामीणों ने प्राणपुर पुलिस थाने पर शनिवार को हमला कर दिया था, जिसमें पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। 

थाने पहुंचे ग्रामीणों ने परिसर में की तोड़फोड़ 
जानकारी के मुताबिक, 40 वर्षीय प्रमोद कुमार सिंह की कथित तौर पर हिरासत में मौत होने की खबर आने के बाद थाने पहुंचे ग्रामीणों ने विरोध में तोड़फोड़ की और परिसर में रखे वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रमोद सिंह को शुक्रवार को कथित तौर पर शराब की बोतलें रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जबकि बिहार में शराबबंदी है। अधिकारी ने बताया कि घायल थाना प्रभारियों की पहचान प्राणपुर पुलिस थाने के मनीतोष कुमार और डंडखोरा पुलिस थाने के प्रभारी शैलेश कुमार के तौर पर की गई है। 

यह भी पढ़ें- ‘हिरासत में मौत' के बाद भड़की भीड़ः लाठियां एवं लोहे की रॉड से थाने पर किया हमला, 7 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल 

घायल पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती 
कार्यकारी पुलिस अधीक्षक दयाशंकर ने शनिवार को बताया था, ‘‘सभी घायल पुलिसकर्मियों को कटिहार के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित है और हमारी टीम वहां डेरा डाले हुए है।'' उन्होंने दावा किया कि प्रमोद सिंह का शव तब मिला, जब पुलिस उसे अदालत में पेश करने के लिए दस्तावेज तैयार कर रही थी। घटना की जानकारी जब ग्रामीणों तक पहुंची तो वे लाठी और लोहे की छड़ों के साथ पुलिस थाने पहुंचे तथा पुलिस कर्मियों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। गौरतलब है कि बिहार में पांच अप्रैल 2016 से ही शराब के उत्पादन, बिक्री, भंडारण, परिवहन और सेवन पर रोक है तथा इसका उल्लंघन बिहार निषेध एवं आबकारी अधिनियम 2016 के तहत दंडनीय अपराध है।

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