सड़क हादसों के हॉटस्पॉट बने बिहार के ये 6 जिले, देश के टाॅप-100 जिलों में शामिल; अब सुधार के लिए जल्द होगा ये काम

Edited By Harman, Updated: 09 Jan, 2026 08:59 AM

these 6 districts of bihar have become hotspots for road accidents

Bihar Accident Districts: देशभर में सड़क दुर्घटनाओं की अधिकता वाले 100 जिलों की पहचान की गई है, जिनमें बिहार के छह जिले-पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं। इन जिलों में दुर्घटनाओं की संख्या को न्यूनतम या शून्य करने के उद्देश्य...

Bihar Accident Districts: देशभर में सड़क दुर्घटनाओं की अधिकता वाले 100 जिलों की पहचान की गई है, जिनमें बिहार के छह जिले-पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा शामिल हैं। इन जिलों में दुर्घटनाओं की संख्या को न्यूनतम या शून्य करने के उद्देश्य से इन्हें ‘जीरो फैटेलिटी जिला' के रूप में चिन्हित किया गया है। यह जानकारी राज्य के परिवहन सह ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने दी। मंत्री ने नयी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार इन जिलों में दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान कर उन्हें शून्य करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। 

दुर्घटनाओं को शून्य करने के लिए जन-जागरुकता कार्यक्रम आयोजित 

श्रवण कुमार ने कहा कि राज्य में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नियमित रूप से विभिन्न समितियों की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करने के लिए वर्ष 2025 में कुल 484 बैठकें की गईं, जिनमें जिलों की स्थानीय परिस्थितियों, दुर्घटना संभावित स्थलों और प्रमुख जोखिम कारकों की समीक्षा जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, परिवहन, पथ निर्माण एवं अभियांत्रिकी विभाग के स्तर से की गई। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से एक से 31 जनवरी तक सभी जिलों में व्यापक जन-जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें रैली, मार्च, मैराथन, वाहन चालकों का प्रशिक्षण, स्कूल-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम और क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर की मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं। 

ब्लैक और ग्रे स्पॉट की पहचान और सुधार

मंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटना प्रवण क्षेत्रों के रूप में ब्लैक स्पॉट और ग्रे स्पॉट की पहचान की गई है। एनएचएआई के अनुसार, राज्य में वर्ष 2022 में 160, 2023 में 145 और 2024 में 114 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए। वहीं पथ निर्माण विभाग ने 2022 में 96, 2023 में 96 और 2024 में 91 ब्लैक स्पॉट की पहचान की है। इन स्थानों पर तेज मोड़ों को सुरक्षित बनाने, साइन बोर्ड लगाने, सड़क चौड़ीकरण और बैरिकेडिंग जैसे सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ब्लैक स्पॉट सड़क का वह हिस्सा होता है, जहां पिछले तीन से पांच वर्षों के आंकड़ों के आधार पर सर्वाधिक दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की जाती हैं। इनमें तेज मोड़, खराब डिजाइन वाले चौराहे, अंधेरे क्षेत्र, गड्ढे या बार-बार दुर्घटना वाले स्थान शामिल होते हैं। इनके सुधार के लिए साइन बोर्ड, सड़क चौड़ीकरण, अंडरपास-ओवरपास निर्माण, मरम्मत, अवैध कट बंद करना, अवरोधक लगाना और जागरुकता अभियान जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। 

‘गोल्डन ऑवर' में मदद करने वाले को मिलेगा  25 हजार रुपए

श्रवण कुमार ने कहा कि विभाग दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद और इलाज के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है। दुर्घटना प्रभावितों को कैशलेस उपचार और हिट एंड रन मुआवजा योजना का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में मृतकों के आश्रितों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। बिहार से 16,319 मृतकों से संबंधित 9,617 आवेदन मुंबई स्थित साधारण बीमा परिषद को भेजे गए हैं, जिनमें से 73 प्रतिशत मामलों में मुआवजा भुगतान हो चुका है। इसके अलावा दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन ऑवर' में मदद करने वाले गुड सेमेरिटन (राहगीर) को 25 हजार रुपए नकद इनाम देने की घोषणा की गई है। 

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