एम्स का कमाल! चारा काटने वाली मशीन से कटा 6 साल की मासूम का हाथ, डॉक्टरों ने फिर से जोड़ा

Edited By Ramanjot, Updated: 03 Mar, 2026 10:51 AM

miracle of aiims patna 6 year old girl s amputated hand joined in 6 hou

एम्स पटना के चिकित्सकों ने माइक्रोसर्जरी से छह वर्षीय लक्ष्मी कुमारी का लगभग कटा दाहिना हाथ सफलतापूर्वक पुनः प्रत्यारोपित किया। चारा काटने की मशीन से घायल बच्ची को आपातकालीन विभाग में भर्ती कर छह घंटे चली सर्जरी में नसों, धमनियों और स्नायु की मरम्मत...

Bihar News : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना के चिकित्सकों ने आधुनिक माइक्रोसर्जरी के करिश्मे का प्रदर्शन करते हुए एक छह वर्ष की बच्ची का लगभग पूरी तरह कटा हुआ दाहिना हाथ सफलतापूर्वक पुन: प्रत्यारोपित (री-इम्प्लांट) कर दिया है। 

6 घंटे तक चली सर्जरी 
इस प्रत्यारोपण की निगरानी कर रही प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. वीना सिंह ने सोमवार को बताया कि वैशाली जिले की छह वर्षीय लक्ष्मी कुमारी का हाथ शनिवार दोपहर करीब 2:00 बजे चारा काटने की मशीन से लगभग पूरी तरह कट गया था। स्थानीय चिकित्सकों के रेफर करने के बाद बच्ची को संध्या करीब 7:30 बजे ‘एम्स' पटना के इमरजेंसी विभाग लाया गया। डॉ. सिंह ने बताया कि बच्ची के अस्पताल में आने के फौरन बाद प्लास्टिक सर्जरी और एनेस्थीसिया (निश्चेतना) टीम को सक्रिय किया गया, जबकि ऑर्थोपेडिक्स विभाग को तैयार रहने के लिए कहा गया। पूरी मुस्तैदी के साथ 30 मिनट के भीतर बच्ची को ऑपरेशन थियेटर में शिफ्ट कर दिया गया। उन्होंने बताया कि माइक्रोसर्जरी प्रक्रिया रात करीब 8:00 बजे शुरू हुई और लगभग छह घंटे तक चली। 

एक-दो महीने में काम करने लगेंगे बच्ची के हाथ
सर्जनों ने नसों, धमनियों, टेंडन (स्नायु) और अन्य नाजुक संरचनाओं की बारीकी से मरम्मत कर रक्त संचार और हाथ की जीवंतता को बहाल किया और ऑपरेशन तड़के लगभग 2:00 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। चिकित्सक ने बताया कि यह सर्जरी डॉ. अंसारुल, डॉ. कुलदीप, डॉ. मैरी, डॉ. अजीना, डॉ. निकिता और डॉ. अनुप की टीम ने अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को एनेस्थीसिया, ऑपरेशन थियेटर और नर्सिंग टीम का विशेष सहयोग मिला। डॉ. सिंह ने बताया कि बच्ची की स्थिति स्थिर है और उसकी उंगलियों में रक्त संचार के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उचित पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के साथ अगले एक-दो महीने में बच्ची के हाथ कम करने लगेंगे। 

चिकित्सक ने बताया कहा कि यह मामला समन्वित उपचार के साथ एक बच्चे के भविष्य से भी जुडा हुआ है। उन्होंने बताया भविष्य में ऐसे मामलों में सावधानी के लिए बताया कि भी भी ऐसी घटना के बाद कटे हुए अंग को साफ प्लास्टिक बैग में रखकर, उसे बर्फ के टुकड़ों वाले दूसरे बैग में रखना चाहिए। अंग को सीधे बर्फ के संपर्क में नहीं लाना चाहिए और न ही उसे पानी या किसी अन्य तरल में डुबोना चाहिए। डॉ. सिंह ने इस अतुल्य और करिश्माई सर्जरी को संभव बनाने के लिए चिकित्सा और सहायक टीमों के त्वरित समन्वय तथा उत्कृष्ट चिकित्सकीय कार्य की सराहना की।  

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