107 वर्षों की गौरवगाथा: हजारीबाग की ऐतिहासिक रामनवमी का आयोजन बना आस्था का केंद्र

Edited By Khushi, Updated: 27 Mar, 2026 05:08 PM

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Jharkhand News: झारखंड का हजारीबाग जिला एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक रामनवमी के भव्य आयोजन को लेकर देश-दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वर्ष 2026 की रामनवमी विशेष मायने रखती है, क्योंकि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के बाद यह...

Jharkhand News: झारखंड का हजारीबाग जिला एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक रामनवमी के भव्य आयोजन को लेकर देश-दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वर्ष 2026 की रामनवमी विशेष मायने रखती है, क्योंकि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के बाद यह पहला प्रमुख पर्व है, जो श्रद्धा, आस्था और उत्साह के अछ्वुत संगम के रूप में मनाया जा रहा है। दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के साथ यह पर्व सुख-समृद्धि का संदेश लेकर आया है।

हजारीबाग की रामनवमी की पहचान इसकी अनूठी झांकियों, पारंपरिक कला-कौशल और अखाड़ों की जीवंत प्रस्तुतियों से होती है। यहां रामेश्वरम, रामसेतु और अयोध्या धाम जैसे पौराणिक स्थलों की झलक एक साथ देखने को मिलती है। खास बात यह है कि जब देश के अन्य हिस्सों में रामनवमी का समापन हो जाता है, तब हजारीबाग में ‘इंटरनेशनल रामनवमी' का उत्साह अपने चरम पर पहुंचता है। करीब 107 वर्ष पूर्व 1918 में गुरु सहाय ठाकुर, हीरालाल महाजन और टीभर गोप जैसे समाजसेवियों ने महावीरी पताका के साथ इस परंपरा की शुरुआत की थी, जो आज विशाल स्वरूप धारण कर चुकी है। दशमी की शाम से शुरू होने वाली यह शोभायात्रा एकादशी की रात तक निरंतर चलती है, जिसमें सैकड़ों अखाड़ों के सदस्य केसरिया ध्वज के साथ पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। तासों की गूंज, लाठियों की तड़तड़ाहट और पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन से पूरा शहर भक्तिमय और उत्साहपूर्ण वातावरण में डूब जाता है। इतिहास में कई बार विषम परिस्थितियों के बावजूद हजारीबाग ने सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की है।

वर्ष 1973, 1989 और 2016 जैसी चुनौतियों के समय भी यहां के नागरिकों ने एकजुटता का परिचय देते हुए शांति बनाए रखी। यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी अहम आधार है। मूर्तिकारों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को इससे व्यापक रोजगार मिलता है। साथ ही प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर इस आयोजन को विशेष सम्मान भी दिया जाता रहा है। अब मांग उठ रही है कि हजारीबाग की इस ऐतिहासिक रामनवमी को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए। नागरिकों से अपील की गई है कि वे भगवान श्रीराम के आदर्शों का पालन करते हुए शांति, सौहार्द और अनुशासन के साथ इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनें।

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