जमशेदपुर में आई दुनिया की सबसे छोटी गाय 'गौरी', पुंगनूर मिनी नस्ल से रोजाना देती है 1 लीटर दूध; देखने के लिए लोगों की लगी लाइन

Edited By Khushi, Updated: 19 Mar, 2026 01:24 PM

world s smallest cow  gauri  arrives in jamshedpur this punganur mini breed cow

Jharkhand News: झारखंड के जमशेदपुर में इन दिनों एक खास और बहुत ही छोटी गाय चर्चा का विषय बनी हुई है। यह गाय आम गायों से बिल्कुल अलग है। इसकी ऊंचाई केवल डेढ़ फीट और वजन लगभग 20–25 किलो है। इसे पुंगनूर नस्ल की “मिनी मिनिएचर” गाय माना जाता है और यह...

Jharkhand News: झारखंड के जमशेदपुर में इन दिनों एक खास और बहुत ही छोटी गाय चर्चा का विषय बनी हुई है। यह गाय आम गायों से बिल्कुल अलग है। इसकी ऊंचाई केवल डेढ़ फीट और वजन लगभग 20–25 किलो है। इसे पुंगनूर नस्ल की “मिनी मिनिएचर” गाय माना जाता है और यह दुनिया की सबसे छोटी गायों में गिनी जाती है।

गाय को देखने के लिए लोगों की लगी लाइन
शहर के मोहित गुप्ता और उनके भाई रोहित गुप्ता ने यह गाय दक्षिण भारत से लेकर आए हैं। इस नस्ल का पालन वहां पारंपरिक तरीके से किया जाता है। जमशेदपुर में इस तरह की गाय पहली बार आई है, इसलिए लोग इसे देखने के लिए उत्साहित हैं। गाय का नाम “गौरी” रखा गया है और इसके साथ आए बछड़े का नाम “गोपाल” है। गौरी लगभग 12 महीने की है और जल्द ही दूध देना शुरू कर देगी। छोटे आकार और शांत स्वभाव के कारण यह गाय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। पुंगनूर नस्ल मूल रूप से दक्षिण भारत की देसी नस्ल है।

पुंगनूर मिनी नस्ल से रोजाना देती है 1 लीटर दूध
खास बात यह है कि इतनी छोटी होने के बावजूद यह गाय रोजाना लगभग 1 लीटर दूध दे सकती है। इसका दूध वसा में उच्च होता है, जिसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। देखभाल में भी यह गाय आसान है। यह दिनभर में केवल 1–1.5 किलो चारा खाती है और कम जगह में भी पाली जा सकती है। इसलिए शहरों में इसका पालन करना आसान है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह गाय खास मानी जाती है। माना जाता है कि पुराने समय में ऋषि-मुनि भी इस तरह की छोटी गायों का पालन करते थे।

इस पहल में पश्चिमी सिंहभूम के विधायक सरयू राय ने भी रुचि दिखाई है। उन्होंने बिरला मंदिर परिसर में गोसेवा क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई है, जहां इस तरह की मिनी गायों का पालन किया जाएगा। इससे लोग देसी नस्लों के महत्व को जान सकेंगे। फिलहाल जमशेदपुर में यह छोटी गाय लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बनी हुई है। आने वाले समय में यह पहल न केवल इस नस्ल के संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि पारंपरिक पशुपालन को नई पहचान भी देगी।

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