Edited By Ramanjot, Updated: 14 Feb, 2026 10:29 PM

Bihar State Election Authority ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। राज्य के 24 जिलों में कुल 436 पैक्स समितियों के लिए 18 मार्च 2026 को मतदान कराया जाएगा।
पटना: Bihar State Election Authority ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। राज्य के 24 जिलों में कुल 436 पैक्स समितियों के लिए 18 मार्च 2026 को मतदान कराया जाएगा। खास बात यह है कि वोटिंग समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन मतगणना भी होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। पैक्स समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। किसानों को ऋण, खाद-बीज, कृषि उपकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ इन्हीं समितियों के माध्यम से मिलता है।
चुनाव कार्यक्रम की अहम तारीखें
- नामांकन दाखिल करने की तिथि: 6 और 7 मार्च 2026
- नामांकन पत्रों की जांच: 9 और 10 मार्च 2026
- नाम वापसी की अंतिम तिथि: 11 मार्च 2026
- मतदान: 18 मार्च 2026 (सुबह 7 बजे से शाम 4:30 बजे तक)
- मतगणना और परिणाम: 18 मार्च को ही मतदान के बाद
आरक्षण व्यवस्था
मैनेजमेंट कमिटी के पदों में आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा:
- अनुसूचित जाति/जनजाति – 2 सीट
- पिछड़ा वर्ग – 2 सीट
- अति पिछड़ा वर्ग – 2 सीट
इन आरक्षित सीटों में से आधी सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी।
जिलों में पैक्स की स्थिति
सबसे अधिक पैक्स अररिया (70), मधुबनी (69) और भागलपुर (64) में हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर में सबसे कम, केवल 1 पैक्स में चुनाव होना है। सीवान (37), कटिहार (22), सुपौल (21) और सारण (20) जैसे जिलों में भी उल्लेखनीय संख्या में चुनाव होंगे।
जिन जिलों में मतदान होगा, उनमें अररिया, औरंगाबाद, कटिहार, कैमूर, खगड़िया, जहानाबाद, दरभंगा, पूर्णिया, पूर्वी चंपारण, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधुबनी, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, रोहतास, लखीसराय, समस्तीपुर, सहरसा, सारण, सीतामढ़ी, सीवान और सुपौल शामिल हैं।
प्रशासनिक तैयारी
चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए संबंधित जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा, बुनियादी सुविधाएं और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
एक ही दिन मतदान और मतगणना से प्रक्रिया तेज होगी और परिणाम के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण इलाकों में इन चुनावों को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि पैक्स समितियां सीधे तौर पर किसानों के हितों से जुड़ी होती हैं।