Edited By Ramanjot, Updated: 12 Jan, 2026 09:26 PM

राष्ट्रीय युवा दिवस पर सोमवार को बिहार स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (बीएसएसीएस) एवं बीडी कॉलेज पटना के संयुक्त तत्वावधान में एचआईवी/एड्स जागरूकता को लेकर स्किट प्रतियोगिता एवं आरआरसी टॉक का आयोजन किया गया।
Bihar News: राष्ट्रीय युवा दिवस पर सोमवार को बिहार स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (बीएसएसीएस) एवं बीडी कॉलेज पटना के संयुक्त तत्वावधान में एचआईवी/एड्स जागरूकता को लेकर स्किट प्रतियोगिता एवं आरआरसी टॉक का आयोजन किया गया। बापू टॉवर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना निदेशक सुमित कुमार ने कहा कि एचआईवी के खिलाफ इस लड़ाई में युवाओं की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि युवा समाज में जागरूकता और सकारात्मक संदेश पहुंचाने की सबसे सशक्त कड़ी हैं। बिहार स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी एचआईवी/एड्स की रोकथाम, नियंत्रण एवं जागरूकता के लिए निरंतर योजनाबद्ध और प्रभावी कार्य कर रही है।
300 युवाओं की स्किट ने तोड़ी मिथक
उन्होंने युवाओं से सुरक्षित व्यवहार अपनाने, नियमित एचआईवी जांच कराने और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। कहा कि सही जानकारी, सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास से ही एचआईवी/एड्स पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
बीडी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रत्ना अमृत ने कहा कि रेड रिबन क्लब युवाओं और छात्र-छात्राओं को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक करने का एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि कॉलेज के छात्र-छात्राएं समाज में जागरूकता फैलाने और भ्रांतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने युवाओं से रेड रिबन क्लब से सक्रिय रूप से जुड़कर जागरूकता अभियानों में भाग लेने का आह्वान किया। कहा कि सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और जिम्मेदार व्यवहार के माध्यम से ही एचआईवी/एड्स मुक्त समाज की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
HIV की भ्रातियाँ हों दूर
कार्यक्रम के दौरान 22 शिक्षण संस्थानों के लगभग 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा एचआईवी/एड्स जागरूकता विषय पर अपने विचार साझा किए गए। वहीं विभिन्न शिक्षण संस्थानों की टीमों की ओर से प्रस्तुत स्किट के माध्यम से आमजन को यह संदेश दिया गया कि एड्स किसी के साथ रहने, छूने अथवा सामाजिक संपर्क से नहीं फैलता, बल्कि यह मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई के उपयोग एवं संक्रमित रक्त के माध्यम से फैलता है। इस दौरान समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया।