बक्सर कोर्ट का बड़ा फैसला: 9 साल पुरानी हत्या में चार दोषियों को उम्रकैद, जिला पार्षद के पति भी शामिल

Edited By Ramanjot, Updated: 10 Dec, 2025 09:14 AM

buxar murder case verdict

बिहार के बक्सर जिले में 2016 की एक सनसनीखेज हत्या के मामले में मंगलवार को कोर्ट ने लंबे इंतजार के बाद न्याय की जीत दर्ज की। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ल की अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

Buxar Murder Case Verdict: बिहार के बक्सर जिले में 2016 की एक सनसनीखेज हत्या के मामले में मंगलवार को कोर्ट ने लंबे इंतजार के बाद न्याय की जीत दर्ज की। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ल की अदालत ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में स्थानीय जिला पार्षद सदस्य के पति और प्रतिनिधि रिंकू यादव, रामाशीष उर्फ चतुरी, अजय कुमार पांडे और जयराम पासवान शामिल हैं। सभी पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।

रात के अंधेरे में गोली मारकर उतारा मौत के घाट

घटना 22 अगस्त 2016 की रात की है। मृतक हरेंद्र सिंह बस स्टैंड से अपने घर सोहनीपट्टी जा रहे थे। रात करीब 9:30 बजे पोखरा के पास आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और गोली मारकर हत्या कर दी। अगले दिन मृतक की पत्नी इंदू सिंह ने नगर थाने में FIR दर्ज कराई, जिसका कांड संख्या 382/2016 बना।

जांच में सामने आया कि हत्या की मुख्य वजह जमीन का पुराना विवाद था। फरार चल रहे मुख्य साजिशकर्ता विकास शर्मा ने मृतक से जमीन के नाम पर 12 लाख रुपये लिए थे, लेकिन रकम लौटाने से बचने के लिए उसने पूरी साजिश रची और हत्या करवा दी।

10 गवाहों की गवाही से साबित हुआ अपराध

अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक रामनाथ ठाकुर ने मजबूत दलीलें पेश कीं। कुल 10 गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने सजा के तौर पर: IPC की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास, धारा 326 के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास, आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत 4 वर्ष की सजा। साथ ही पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

दो मुख्य आरोपी अब भी फरार

मामले में मुख्य साजिशकर्ता विकास शर्मा और संतोष पासवान अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। तीन अन्य आरोपी ट्रायल के दौरान कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। पुलिस इनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। न्याय की यह जीत पीड़ित परिवार के लिए नौ साल बाद राहत लेकर आई है और जमीन विवाद में हिंसा के खिलाफ कड़ा संदेश देती है।

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