शादियों में Gold बैन! सोने-चांदी की कीमतों ने छुड़ाए पसीने तो 14 गांवों ने लिया चौंकाने वाला फैसला

Edited By Ramanjot, Updated: 07 Feb, 2026 01:58 PM

gold ban in weddings 14 villages have taken a big decision

Gold Ban in Weddings : डूंगरपुर जिले के साबला और आसपुर क्षेत्र के 14 गांवों के आदिवासी समाज ने बढ़ती महंगाई और फिजूलखर्ची के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला लिया है।

Gold Ban in Weddings: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों और सामाजिक आयोजनों में बढ़ती दिखावे की संस्कृति के बीच, राजस्थान के डूंगरपुर जिले के आदिवासी समाज ने सुधार की एक नई मिसाल पेश की है। साबला और आसपुर क्षेत्र के 14 गांवों के आदिवासी समाज ने ओडा गांव में आयोजित एक महापंचायत में सदियों पुरानी परंपराओं को बदलते हुए कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। समाज का स्पष्ट मानना है कि आर्थिक बोझ से दबने के बजाय सादगी और शिक्षा ही प्रगति का असली मार्ग है। 

सोना प्रतिबंधित, चांदी की भी सीमा तय 

सराफा बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए, जहां सोने के भाव 1.72 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, समाज ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को कर्ज के जाल से बचाने के लिए निम्नलिखित नियम लागू किए हैं: 

सोने के आभूषण: वैवाहिक कार्यक्रमों में सोने के जेवरात पहनने और चढ़ाने पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। 

चांदी की सीमा: विवाह में चांदी के जेवरात का वजन भी अब अधिकतम 50 ग्राम तक ही सीमित रहेगा। 

लेन-देन पर रोक: करियावर और शादी-ब्याह में कपड़ों के अतिरिक्त लेन-देन को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। केवल 'मामेरा' की रस्म निभाई जाएगी। 

डीजे और फिजूलखर्ची पर 'ब्रेक' 

सामाजिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण और अनावश्यक खर्च को रोकने के लिए डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। समाज ने स्पष्ट किया कि विवाह समारोह को तमाशा बनाने के बजाय उसे एक सादगीपूर्ण धार्मिक और सामाजिक संस्कार के रूप में मनाया जाए। 

मोबाइल, बाइक और सुरक्षा के नए नियम 

युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंचायत ने कड़े निर्देश जारी किए हैं: 

मोबाइल: कुंवारी लड़कियों को मोबाइल फोन नहीं देने का निर्णय लिया गया है। 

बाइक: नाबालिग युवाओं द्वारा बाइक चलाने पर रोक रहेगी। बालिग युवाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। 

शिक्षा: समाज ने 'शिक्षा ही विकास का आधार है' का नारा देते हुए अभिभावकों को पाबंद किया है कि वे बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूल भेजें। 

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई 

बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि समाज द्वारा बनाए गए इन नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए आवश्यक है।

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