नीतीश का लालू पर तीखा प्रहार- जेल गए तो पत्नी को गद्दी पर बिठा दिया लेकिन....

Edited By Ramanjot, Updated: 30 Oct, 2020 05:56 PM

nitish attacked on lalu yadav

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में महिलाओं के अधिकार को लेमुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंदर (जेल) गए तो पत्नी (राबड़ी देवी) को गद्दी पर बैठा दिया लेकिन उस सरकार ने महिलाओं के...

खगड़िया/सीतामढ़ी/शिवहरः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में महिलाओं के अधिकार को लेमुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंदर (जेल) गए तो पत्नी (राबड़ी देवी) को गद्दी पर बैठा दिया लेकिन उस सरकार ने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया।

जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने खगड़िया जिले के परबत्ता और खगड़िया, सीतामढ़ी जिले के बेलसंड और शिवहर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘राजग से पहले के 15 साल की सरकार ने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया। अंदर गए तो पत्नी को गद्दी पर बैठा दिया लेकिन महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं किया। लेकिन, हमारी सरकार बनी तो हमने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। इनके अलावा अनुसूचित जाति (SC) को 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को एक प्रतिशत और अतिपिछड़ा वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया है।

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने कहा कि पहले की सरकार में नाम मात्र की महिला जनप्रतिनिधि होती थीं लेकिन आज हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी है। सबको जन प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। सबकी इज्जत बढ़ी है और सबको सेवा करने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि वह तो हमेशा कहते रहे हैं जब महिला और पुरुष दोनों साथ मिलकर काम करेंगे तभी समाज आगे बढ़ेगा। आज प्रगति पथ पर बिहार के निरंतर अग्रसर होने का सबसे बड़ा कारण हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का बढ़ना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए उनकी सरकार ने काफी काम किए है। जब महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पूरे देश में स्वयं सहायता समूह का गठन हो रहा था उस समय बिहार में ऐसा एक भी समूह नहीं था। जब राज्य में उनकी सरकार बनी तो उन्होंने विश्व बैेंक से ऋण लेकर जीविका समूह के नाम से स्वयं सहायता समूह का गठन कराया। आज इसकी संख्या 10 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि बिहार के जीविका समूह की परिकल्पना इतनी कारगर रही कि तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिहार के इस मॉडल को अपनाया और पूरे देश में इसे आजीविका समूह का नाम दिया।

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