सुशील मोदी की RJD को सलाह- द्रौपदी मुर्मू के संबंध में अपने निर्णय पर करें पुनर्विचार

Edited By Ramanjot, Updated: 04 Jul, 2022 10:30 AM

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सुशील मोदी ने रविवार को कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को जब राष्ट्रपति बनाने का मौका मिला तो एक मुस्लिम को राष्ट्रपति बनाया और जब नरेंद्र मोदी को दो बार मौका मिला तो एक बार दलित और दूसरी बार आदिवासी महिला का नाम प्रस्तावित किया है। उन्होंने कहा कि...

पटनाः बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के संबंध में अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

सुशील मोदी ने रविवार को कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को जब राष्ट्रपति बनाने का मौका मिला तो एक मुस्लिम को राष्ट्रपति बनाया और जब नरेंद्र मोदी को दो बार मौका मिला तो एक बार दलित और दूसरी बार आदिवासी महिला का नाम प्रस्तावित किया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की पहली आदिवासी महिला की उम्मीदवारी का पूरे देश ने स्वागत किया है। भाजपा सांसद ने कहा कि गैर एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) दल भी समर्थन देने के लिए आगे आ रहे हैं। पहले अकाली दल और अब कर्नाटक का जनता दल सेक्यूलर (जेडीएस) जिसके नेता पूर्व प्रधानमंत्री देवगौडा हैं, ने भी समर्थन देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा भी दुविधा में है। यशवंत सिन्हा के नामांकन में झामुमो शामिल नहीं हुआ। संभावना है कि झामुमो द्रोपदी मुर्मू को अपना समर्थन देगा।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी यह कहना पड़ा कि यदि भाजपा द्रोपदी मुर्मू के नाम की घोषणा के पूर्व बातचीत की होती तो वह भी मुर्मू के नाम पर विचार करतीं। उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों की दुहाई देने वाले राजद को भी अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। राजद की अग्नि परीक्षा है कि वह एक आदिवासी महिला का समर्थन करती है या किसी अन्य का। भाजपा सांसद ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू केवल आदिवासी महिला ही नहीं है बल्कि उड़ीसा की एक आदिवासी बहुल जिले मयूरभंज के रायरंगपुर नगर निगम की उपाध्यक्ष, स्कूल शिक्षिका, राज्य सरकार में मंत्री, राज्यपाल से होते हुए राष्ट्रपति पद तक पहुंचने की संघर्षशील यात्रा की परिणति है। अपने 2 जवान बेटों और पति को खोने के बाद भी समाज सेवा के पथ से वह कभी विरक्त नहीं हुई। राष्ट्रपति पद की ऐसी उम्मीदवार का 5 जुलाई को बिहार आगमन पर हार्दिक स्वागत है।

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