अपराध की इतनी बड़ी सजा! होटवार जेल में पत्थर जैसी रोटी, पानी जैसी दाल खाने को मजबूर कैदी, बोले- जानवर भी ऐसा खाना न खाएं

Edited By Khushi, Updated: 19 Nov, 2025 12:34 PM

such a severe punishment for a crime prisoners in hotwar jail are forced to eat

Ranchi News: झारखंड के रांची के होटवार जेल में रह रहे कैदी काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यहां कैदी पत्थर जैसी रोटी, पानी जैसी दाल खाने को मजबूर हैं। इसके चलते कैदियों ने होटवार जेल की भोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Ranchi News: झारखंड के रांची के होटवार जेल में रह रहे कैदी काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यहां कैदी पत्थर जैसी रोटी, पानी जैसी दाल खाने को मजबूर हैं। इसके चलते कैदियों ने होटवार जेल की भोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

"दाल के नाम पर सिर्फ पानी परोसा जाता है"
कैदियों का कहना है कि उन्हें ऐसा खाना दिया जाता है जिसे जानवर भी न खाएं। यह खुलासा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा 12 से 29 नवंबर तक चलाए जा रहे निरीक्षण अभियान के दौरान सामने आया। इस अवधि में 400 कैदियों, जिनमें 200 विचाराधीन और 200 सजायाफ्ता कैदी शामिल थे, से बातचीत में भोजन व्यवस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य मिले। कैदियों ने बताया कि उन्हें रोज़ाना बेहद निम्न गुणवत्ता का खाना दिया जाता है। रोटी इतनी सख्त होती है कि रातभर में पत्थर जैसी जम जाती है, जिसे कई कैदी मजबूरी में आग पर सेंककर खाने लायक बनाते हैं। कैदियों ने कहा कि “दाल के नाम पर सिर्फ पानी” परोसा जाता है। उनका आरोप है कि अधिकारियों के निरीक्षण के दिनों में ही भोजन की गुणवत्ता सुधारी जाती है, जबकि बाकी समय बासी और घटिया खाना दिया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों के लिए स्थिति और भी खराब है, क्योंकि उनके पास अतिरिक्त भोजन खरीदने का कोई विकल्प नहीं होता।

"जेल प्रशासन कई मामलों में कार्रवाई नहीं करता"
कैदियों ने बताया कि खाना ही नहीं जेल के भीतर दबंग कैदियों का नेटवर्क सक्रिय रहता है, जो शिकायत करने वालों पर दबाव बनाते हैं। कैदियों ने बताया कि जेल प्रशासन कई मामलों में कार्रवाई नहीं करता, जिससे पीड़ित कैदियों की आवाज दब जाती है। जेल मैनुअल के मुताबिक कैदियों को सप्ताह में तीन दिन नॉन-वेज दिया जाना अनिवार्य है और शाकाहारी कैदियों के लिए पनीर, खीर और मिक्स वेज जैसी विशेष डिशेज का प्रावधान है, लेकिन कैदियों का आरोप है कि ये व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

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