बंगाल से अगवा, बिहार में 1.50 लाख में बिका! 6 साल का बच्चा टेंट से बरामद

Edited By Ramanjot, Updated: 16 Feb, 2026 10:29 PM

bihar human trafficking case

बिहार के पूर्णिया जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानव तस्करी के खतरे को फिर उजागर कर दिया है। छह वर्षीय अपहृत बच्चे को के. हाट थाना क्षेत्र के रंगभूमि मैदान में लगे एक अस्थायी टेंट से सुरक्षित बरामद किया गया। य

पटना: बिहार के पूर्णिया जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानव तस्करी के खतरे को फिर उजागर कर दिया है। छह वर्षीय अपहृत बच्चे को के. हाट थाना क्षेत्र के रंगभूमि मैदान में लगे एक अस्थायी टेंट से सुरक्षित बरामद किया गया। यह बच्चा दो दिन पहले Jalpaiguri district के माल बाजार थाना क्षेत्र (पश्चिम बंगाल) से लापता हुआ था।

कैसे हुआ अपहरण?

जानकारी के मुताबिक, बच्चा अपने घर के पास खेल रहा था, तभी एक व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोपी बस के जरिए बच्चे को बिहार लेकर पहुंचा। परिजनों ने तुरंत माल बाजार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनमें संदिग्ध व्यक्ति बच्चे के साथ जाता हुआ नजर आया। फुटेज के आधार पर जांच तेज हुई और महज सात घंटे में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

1.50 लाख में ‘सौदा’

पूछताछ में अपहरणकर्ता ने खुलासा किया कि उसने बच्चे को पूर्णिया में 1.50 लाख रुपये में बेच दिया था। उसकी निशानदेही पर बंगाल और पूर्णिया पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की।रंगभूमि मैदान में लगे एक टेंट में जड़ी-बूटी बेचने वाले सुरेश सिंह के पास बच्चा सोता हुआ मिला। सुरेश सिंह, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला बताया जा रहा है, ने भी 1.50 लाख रुपये में बच्चे को खरीदने की बात स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, वह बच्चे को आगे अधिक कीमत पर बेचने की तैयारी में था।

 संयुक्त कार्रवाई से खुलासा

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मानव तस्करी का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि सुरेश सिंह लगातार बयान बदल रहा है, इसलिए जांच को और गहराई से आगे बढ़ाया जा रहा है। बच्चे को बंगाल पुलिस की टीम अपने साथ जलपाईगुड़ी ले गई है, जहां उसे परिजनों को सौंपा जाएगा।

संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी

पूर्णिया पुलिस अब जिले में अस्थायी टेंटों और खानाबदोश ठिकानों की जांच कर रही है। हाल ही में जिले में अस्पताल से दो नवजात बच्चों की चोरी की घटना भी सामने आई थी, जिसके बाद सतर्कता और बढ़ा दी गई है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर चौकसी और त्वरित कार्रवाई कितनी जरूरी है।
 

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