Edited By Ramanjot, Updated: 11 Jan, 2026 08:02 PM

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक कथित “7 मिनट 11 सेकंड की वायरल MMS वीडियो” को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स इसके स्क्रीनशॉट और लिंक खोजते नजर आ रहे हैं।
7 Minute 11 Second Viral MMS: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक कथित “7 मिनट 11 सेकंड की वायरल MMS वीडियो” को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। X (ट्विटर), इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स इसके स्क्रीनशॉट और लिंक खोजते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को अलग–अलग नामों से शेयर किया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि यह किसी पाकिस्तानी युवक-युवती से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, अब तक इस वीडियो के अस्तित्व को लेकर कोई भी ठोस या भरोसेमंद सबूत सामने नहीं आया है। न ही किसी प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी ने इस कथित वीडियो की पुष्टि की है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अफवाहों का बाजार लगातार गर्म है।
अफवाहों से बना ‘वायरल कंटेंट’, सच्चाई से दूर
इस कथित वीडियो को लेकर लोगों की उत्सुकता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि इसकी तुलना पहले सामने आए एक 19 मिनट के वायरल वीडियो से की जा रही है। सोशल मीडिया एल्गोरिदम ऐसे कीवर्ड्स को तेजी से बढ़ावा देते हैं, जिनसे क्लिक और एंगेजमेंट मिलता है। ‘7:11 Viral Video’ जैसे शब्द इसी वजह से ट्रेंड में आ गए, जबकि इनका कोई प्रमाणिक आधार नहीं है।
लिंक खोलना पड़ सकता है भारी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कथित वायरल वीडियो के नाम पर मैलवेयर, फिशिंग लिंक और खतरनाक वेबसाइट्स फैलाने का खेल किया जाता है।
अनजान लिंक पर क्लिक करना न सिर्फ गलत जानकारी फैलाता है, बल्कि यूजर्स की निजी जानकारी और डिवाइस की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि आज के दौर में डीपफेक और एडिटिंग तकनीक के जरिए बेहद वास्तविक दिखने वाले लेकिन पूरी तरह फर्जी वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। ऐसे में जो वीडियो असली लग रहा है, वह जरूरी नहीं कि वास्तव में मौजूद भी हो।
शेयर करने से पहले सोचें, अफवाह फैलाने से बचें
साइबर एक्सपर्ट्स और मीडिया विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि किसी भी अनवेरिफाइड वीडियो लिंक को न खोलें,न ही उसे फॉरवर्ड या शेयर करें। जब तक किसी भरोसेमंद स्रोत से पुष्टि न हो जाए, ऐसी खबरों से दूरी बनाए रखें। अफवाहों पर आधारित कंटेंट न सिर्फ नुकसानदायक है, बल्कि कानूनी और साइबर जोखिम भी बढ़ा सकता है।