बिहार चुनाव में करारी हार के बाद चिराग को नहीं मिल रहा भाव, अपने भी दे रहे नसीहत

Edited By Ramanjot, Updated: 21 Nov, 2020 04:12 PM

after the crushing defeat in bihar elections chirag is not getting the price

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान मुसीबत में घिर गए हैं। जहां अब एनडीए में उनको भाव नहीं मिल रहा है, वहीं उनके परिवार वाले भी उनको नसीहत देने लगे हैं। बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने...

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान मुसीबत में घिर गए हैं। जहां अब एनडीए में उनको भाव नहीं मिल रहा है, वहीं उनके परिवार वाले भी उनको नसीहत देने लगे हैं। बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के सपने देखने वाले चिराग पासवान ने चुप्‍पी साध ली है।

चिराग के अपनों ने भी उठाए सवाल
जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार बनी तो चिराग ने अपने तरीके से बधाई दी, लेकिन उनको कोई भाव नहीं मिला। इतना ही नहीं, उनको शपथ ग्रहण समारोह में भी आमंत्रित नहीं किया गया। चुनाव में हार के बाद उनके अपने ही उन पर सवाल उठाने लगे हैं। चिराग के जीजा एवं राजद के के वरिष्ठ नेता अनिल कुमार साधु ने चिराग को नकली हनुमान बताया और कहा कि बाल हठ में उन्होंने अपने ही घर को जला दिया। उन्होंने कहा कि रामविलास जी ने मेहनत से लोजपा को खड़ा किया था और उनके सबके साथ अच्छे रिश्ते थे। लेकिन उनके निधन के सब चौपट हो गया। साधु ने कहा कि चिराग से मेरे पारिवारिक रिश्ते हैं, इसलिए उनके अच्छे-बुरे काम का असर मेरे पर भी पड़ेगा।

मां बोलीं- इतनी सीटों पर नहीं लड़ना चाहिए था चुनाव वहीं रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी ने भी चिराग पासवान को नसीहत दी। उन्होंने कहा कि चिराग को इतनी सीटों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहिए था। उन्होंने कहा कि चिराग मेरा बेटा है। भले मां दो हैं, लेकिन पिता तो एक ही थे। मां होने के नाते मैं सलाह दे सकती हूं। साथ ही उन्होंने नीतीश और लालू यादव की प्रशंसा भी की। राजकुमारी देवी ने कहा कि नीतीश ने अच्छा काम किया तो जनता ने भरोसा किया। शराबबंदी करके भी ठीक किया।

वहीं अब सवाल यह उठ रहा है कि चिराग की हार के लिए उनके उनके अलावा और कौन जिम्मेदार है? कहा जाता है कि चिराग अपने दल में करीबी मित्र सौरभ पाण्डेय पर सबसे ज्यादी भरोसा करते हैं। किसी अन्य नेता की ज्यादा बात भी नहीं सुनते हैं। लोजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि चिराग ने चुनाव में भी किसी की नहीं सुनी और सारे फैसले सौरभ के हिसाब से ही लिए जाते रहे। बिहार में अकेले चुनाव लड़ने को चिराग भले ही खुदा का फैसला बताते हैं, लेकिन यह फॉर्मूला भी सौरभ ने ही बनाया था। चिराग की राजनीति की पूरी स्क्रिप्ट सौरभ ही तैयार करते रहे हैं। बिहार फर्स्‍ट बिहारी फर्स्‍ट विजन डाक्यूमेंट को तैयार कराने में भी सौरभ की बड़ी भूमिका रही है।

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