बिहार कांग्रेस में भूचाल! दो वरिष्ठ नेता 6 साल के लिए निष्कासित,टिकट बेचने के लगे आरोप

Edited By Ramanjot, Updated: 18 Feb, 2026 08:18 PM

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बिहार में कांग्रेस संगठन ने अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए दो वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए बाहर कर दिया है।

पटना: बिहार में कांग्रेस संगठन ने अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए दो वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए बाहर कर दिया है। यह कार्रवाई पूर्व विधायक छत्रपति यादव और रिसर्च विभाग के पूर्व चेयरमैन व पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव के खिलाफ की गई है।

प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि दोनों नेताओं पर लगातार पार्टी लाइन से हटकर बयान देने, संगठन के खिलाफ आरोप लगाने और अनुशासनहीन गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप थे। यह निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (Indian National Congress) के बिहार प्रभारी और प्रदेश नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद लिया गया। प्रदेश कांग्रेस चेयरमैन राजेश राठौड़ ने 18 फरवरी 2026 को इस फैसले की जानकारी सार्वजनिक की।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। महागठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे में देरी और टिकट वितरण को लेकर उठे विवादों ने संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा दिया। पार्टी ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 6 सीटों पर जीत हासिल कर सकी।

चुनाव के दौरान टिकट बेचने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए। आनंद माधव के नेतृत्व में पटना स्थित सदाकत आश्रम में प्रदर्शन हुआ, जहां प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं पर टिकट वितरण में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता करार दिया और अब संबंधित नेताओं के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है।

निष्कासित नेताओं की प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद दोनों नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अनुशासन समिति का गठन ही पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं है और समिति को AICC सदस्य के खिलाफ इतना बड़ा फैसला लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इस कदम को नेतृत्व की “घबराहट” बताया और इसकी वैधता को चुनौती देने के संकेत दिए हैं।

यह घटनाक्रम साफ दिखाता है कि चुनावी हार के बाद बिहार कांग्रेस में आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए अब नेतृत्व अनुशासन के नाम पर सख्ती दिखा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह कदम पार्टी को मजबूत करेगा या आंतरिक विवाद को और बढ़ाएगा।

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