Edited By Ramanjot, Updated: 19 Jan, 2026 11:38 PM

बिहार में अपराधों की वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार पुलिस ने राज्य में छह नई अपराध विज्ञान....
Bihar Cyber Crime News: बिहार में अपराधों की वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार पुलिस ने राज्य में छह नई अपराध विज्ञान प्रयोगशालाएं (Forensic Science Laboratory – FSL) स्थापित करने के लिए 163 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजा है। इसकी जानकारी सोमवार (19 जनवरी 2026) को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी।
फिलहाल बिहार में कुल चार एफएसएल कार्यरत हैं, जिनमें एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला पटना में स्थित है, जबकि तीन क्षेत्रीय एफएसएल मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में संचालित हो रही हैं।
गृह विभाग के जरिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव
अपर पुलिस महानिदेशक (आपराधिक जांच विभाग) पारस नाथ ने बताया कि छह नई एफएसएल खोलने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय से होते हुए राज्य के गृह विभाग के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य अपराधों की जांच में तेजी लाना और फॉरेंसिक साक्ष्यों के समयबद्ध परीक्षण को सुनिश्चित करना है।
मंजूरी मिलते ही 2026 में शुरू होंगी नई प्रयोगशालाएं
एडीजीपी के अनुसार, केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद आवश्यक उपकरणों की खरीद की जाएगी और वर्ष 2026 के दौरान छह नई क्षेत्रीय अपराध विज्ञान प्रयोगशालाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। इससे खासकर जिलों में लंबित साक्ष्य परीक्षण के मामलों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी।
साइबर क्राइम पर भी फोकस, एनएफएसयू से हुआ समझौता
बिहार पुलिस साइबर अपराध से निपटने की क्षमता भी बढ़ा रही है। एडीजीपी पारस नाथ ने बताया कि जुलाई 2025 में राष्ट्रीय अपराध विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) के साथ एक समझौता किया गया है। इसके तहत पटना स्थित राज्य स्तरीय एफएसएल और राजगीर स्थित बिहार पुलिस अकादमी परिसर में साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि साइबर इकाइयों के लिए जरूरी संसाधनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञों की कमी दूर करने की तैयारी
अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि वर्तमान में बिहार की सभी एफएसएल और जिलों में 85 वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक और 44 राजपत्रित अधिकारी कार्यरत हैं। हालांकि, अब भी 100 वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी और 89 सहायक निदेशकों के पद रिक्त हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनवरी के अंत या फरवरी तक संविदा के आधार पर योग्य विशेषज्ञों की नियुक्ति हो जाएगी, जिससे फॉरेंसिक जांच और साक्ष्य परीक्षण की गति में उल्लेखनीय सुधार आएगा।