Edited By Ramanjot, Updated: 05 Feb, 2026 04:52 PM

बिहार STF ने बेंगलुरु में एक साल से छिपे कुख्यात बाप-बेटे, मणिक सिंह और मनोज सिंह को गिरफ्तार किया है। 24 हत्याओं सहित 40 मामलों के आरोपी इन अपराधियों पर बिहार सरकार ने 3 लाख रुपये का इनाम रखा था। स्थानीय पुलिस के सहयोग से कोडिगेहल्ली इलाके में की...
Bihar News : बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत बेंगलुरु में छिपे दो कुख्यात अपराधियों को धर दबोचा है। 24 से ज्यादा हत्याओं और कुल 40 आपराधिक मामलों में वांछित मणिक सिंह और उसके पिता मनोज सिंह को कर्नाटक पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया गया। ये दोनों पिछले एक साल से अपनी पहचान बदलकर दक्षिण भारत में पनाह लिए हुए थे।
तीन राज्यों की पुलिस के लिए थे सिरदर्द
बिहार सरकार द्वारा 3 लाख रुपये के इनामी घोषित किए गए इन अपराधियों का आतंक सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी इनके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं।
- अपराध का रिकॉर्ड: 40 से अधिक आपराधिक मामले।
- गंभीरता: 24 से ज्यादा हत्या के केस।
- इनाम: बिहार सरकार की ओर से 3 लाख रुपये की घोषणा।
पहचान बदलकर कर रहे थे गुजारा
जांच में सामने आया कि मणिक सिंह पिछले एक साल से बेंगलुरु के कोडिगेहल्ली इलाके में रह रहा था। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए उसने बेहद साधारण जीवनशैली अपना रखी थी और छोटे-मोटे पार्ट टाइम काम करके अपना गुजारा कर रहा था। उसके पिता मनोज सिंह भी समय-समय पर आकर उसके साथ रुकते थे।
संयुक्त ऑपरेशन में मिली सफलता
बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सीमंत कुमार सिंह ने बताया कि बिहार STF की टीम ने सूचना के आधार पर बेंगलुरु में दस्तक दी थी। नॉर्थ ईस्ट डिवीजन के डीसीपी और स्थानीय कोडिगेहल्ली पुलिस के समन्वय से इस गुप्त ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
"बिहार पुलिस की टीम और हमारी स्थानीय टीम ने मिलकर इन अपराधियों को सफलतापूर्वक घेराबंदी कर पकड़ा। कोडिगेहल्ली पुलिस ने इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी और जमीनी सहयोग प्रदान किया।" — सीमंत कुमार सिंह, पुलिस कमिश्नर
अब 'स्थानीय मददगारों' की तलाश
गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि बेंगलुरु जैसे महानगर में इन अपराधियों को छिपने में किसने मदद की। पुलिस शहर में रहने के दौरान उनकी गतिविधियों और उनके स्थानीय संपर्कों को खंगाल रही है ताकि किसी संभावित गिरोह का पता लगाया जा सके।