Edited By Ramanjot, Updated: 10 Feb, 2026 05:19 PM

भारत में फैटी लिवर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिससे देश की करीब 35% आबादी प्रभावित है। खराब जीवनशैली, जंक फूड और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण हर तीसरा भारतीय इस 'साइलेंट किलर' की चपेट में है।
Fatty Liver: भारत में साइलेंट किलर के रूप में उभर रही 'लिवर' की बीमारियां अब एक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले रही हैं। हालिया अध्ययनों से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि देश की लगभग 35% आबादी फैटी लिवर की समस्या से ग्रसित है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपके आसपास मौजूद हर तीसरा व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदली हुई जीवनशैली और दोषपूर्ण खान-पान ने इस साधारण दिखने वाली स्थिति को जानलेवा बना दिया है।
क्या है फैटी लिवर और क्यों है यह खतरनाक?
लिवर की कोशिकाओं में जब सामान्य से अधिक वसा (Fat) जमा हो जाती है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर इलाज और परहेज न मिलने पर यह सूजन (Inflammation) और अंततः लिवर सिरोसिस जैसी लाइलाज स्थिति में बदल सकता है।
इन 3 मुख्य कारणों से बढ़ रहा है जोखिम
चिकित्सकों ने फैटी लिवर के बढ़ने के पीछे तीन प्रमुख वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारणों को चिन्हित किया है:
1. इंसुलिन रेजिस्टेंस: मेटाबॉलिज्म का बिगड़ना फैटी लिवर का सबसे बड़ा तकनीकी कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सुस्त हो जाती हैं, तो रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में लिवर मजबूरन उस अतिरिक्त शुगर को फैट में बदलने लगता है। यह समस्या अक्सर टाइप-2 डायबिटीज और बढ़ते मोटापे से जुड़ी होती है।
2. फ्रुक्टोज और जंक फूड का 'कॉकटेल' बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड फूड और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद 'हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप' लिवर का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह लिवर में 'डिनोवो लिपोजेनेसिस' (वसा बनने की प्रक्रिया) को तेज कर देता है। इसके साथ ही बाहर के खाने में इस्तेमाल होने वाला घटिया तेल लिवर की कोशिकाओं को अंदरूनी चोट पहुंचाता है।
3. सेडेंटरी लाइफस्टाइल (शारीरिक निष्क्रियता) शहरीकरण के कारण लोग शारीरिक रूप से कम सक्रिय रह गए हैं। कैलोरी बर्न न होने के कारण लिवर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सप्ताह में मात्र 150 मिनट भी व्यायाम करता है, तो लिवर से फैट कम होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह: बचाव ही सबसे बड़ा उपचार
अच्छी खबर यह है कि लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जो खुद को पुनर्जीवित (Regenerate) कर सकता है। इसे ठीक करने के लिए निम्नलिखित बदलाव अनिवार्य हैं:
आहार में बदलाव: रिफाइंड शुगर, मैदा और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं। फाइबर युक्त भोजन, हरी सब्जियां और साबुत अनाज को प्राथमिकता दें।
सक्रियता: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का तेज पैदल चलना या योगाभ्यास लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
नियमित जांच: 30 की उम्र के बाद समय-समय पर 'लिवर फंक्शन टेस्ट' (LFT) और अल्ट्रासाउंड करवाएं ताकि स्थिति का समय रहते पता चल सके।