बंजर ज़मीन से करोड़ों की कमाई! नरेश कुमार बने बिहार की बागवानी क्रांति की पहचान : राम कृपाल यादव

Edited By Ramanjot, Updated: 15 Jan, 2026 07:54 PM

guava farming success story bihar

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि औरंगाबाद जिले के प्रगतिशील किसान नरेश कुमार ने अपने अदम्य साहस, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं सरकारी योजनाओं के समुचित उपयोग से बंजर भूमि को समृद्ध बागवानी क्षेत्र में परिवर्तित कर बिहार में कृषि नवाचार की एक...

Bihar News: कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि औरंगाबाद जिले के प्रगतिशील किसान नरेश कुमार ने अपने अदम्य साहस, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं सरकारी योजनाओं के समुचित उपयोग से बंजर भूमि को समृद्ध बागवानी क्षेत्र में परिवर्तित कर बिहार में कृषि नवाचार की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने 125 एकड़ बंजर भूमि को फलों के बाग में बदलकर यह सिद्ध किया है कि सही तकनीक, प्रशिक्षण और परिश्रम से खेती को अत्यंत लाभकारी बनाया जा सकता है।

मंत्री ने बताया कि नरेश कुमार ने कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), देव प्रखंड के तकनीकी सहायकों एवं कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीकों को अपनाया। आत्मा, औरंगाबाद से प्राप्त प्रशिक्षण के दौरान उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी दी गई, जिससे उन्होंने योजनाओं का लाभ उठाकर अपने उद्यम को सशक्त बनाया।

सीमित संसाधनों एवं अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 20 प्रगतिशील किसानों का समूह गठित कर मात्र 6,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से 125 एकड़ भूमि लीज पर प्राप्त की। प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत संपूर्ण क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई। कृषि विभाग की संरक्षित खेती योजना के तहत पॉली हाउस का निर्माण कराया गया तथा क्लस्टर आधारित बागवानी योजना के अंतर्गत 25 एकड़ क्षेत्र के लिए 25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त किया गया।

नरेश कुमार द्वारा ताइवान पिंक किस्म के अमरूद की सघन बागवानी की गई, जिससे लगभग 6,000 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 3,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री कर उन्होंने उल्लेखनीय आमदनी अर्जित की। कुल लागत लगभग 50 लाख रुपये रही, जिसमें से 35 लाख रुपये सरकारी अनुदान के रूप में प्राप्त हुए। इस परियोजना से उन्हें लगभग 1.30 करोड़ रुपये की शुद्ध आय हुई, जो बागवानी की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साझा विज़न है कि भारतीय कृषि को परंपरागत सीमाओं से आगे ले जाकर आधुनिक, तकनीक-संचालित और आयवर्धक उद्यम के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि किसान आत्मनिर्भर बन सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो।

मंत्री ने कहा कि इस सफलता में आत्मा, कृषि उद्यान निदेशालय तथा मृदा एवं जल संरक्षण निदेशालय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह मॉडल किसानों को स्वरोजगार, आयवृद्धि एवं प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी वैज्ञानिक कृषि अपनाने एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

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