हाई शुगर कहीं आपको बहरा न बना दे...डायबिटीज मरीज इन 5 लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Edited By Ramanjot, Updated: 14 Feb, 2026 01:38 PM

high sugar can damage both eyes and ears

हाई शुगर कानों की सूक्ष्म नसों को क्षतिग्रस्त कर देती है, जिससे सुनाई देना कम हो जाता है। नियमित जांच, व्यायाम और सही खान-पान ही इस समस्या से बचने का एकमात्र तरीका है।

Diabetes: डायबिटीज को अक्सर एक 'क्रॉनिक' बीमारी के रूप में देखा जाता है जो धीरे-धीरे शरीर के अंगों को खोखला करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रक्त में बढ़ा हुआ शुगर लेवल आपको बहरा भी बना सकता है? सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के हालिया शोध बताते हैं कि मधुमेह रोगियों में सुनने की क्षमता खोने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में दोगुना होता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते शुगर लेवल नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह कानों की नसों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। 

कैसे पहुंचता है कानों को नुकसान? 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Micro-vessels) और नसों को निशाना बनाती है। कानों के भीतर की कार्यप्रणाली इन्हीं संवेदनशील नसों पर टिकी होती है। 

रक्त प्रवाह में बाधा: बढ़ा हुआ ग्लूकोज कानों तक पहुंचने वाली छोटी रक्त नलिकाओं को संकुचित या क्षतिग्रस्त कर देता है। 

नसों की क्षति: जब कानों की नसों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता, तो वे धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं, जिससे सुनने की क्षमता घटने लगती है। 

इन 5 लक्षणों को न करें नजरअंदाज 

आंखों की रोशनी कम होने का पता तो तुरंत चल जाता है, लेकिन सुनने की क्षमता में कमी एक 'धीमी प्रक्रिया' है। यदि आपको ये लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें: 

टिनिटस: कानों में अक्सर घंटी बजने जैसी आवाजें आना। 

शोर में परेशानी: भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बातचीत समझने में कठिनाई होना। 

पुनरावृत्ति: लोगों से बार-बार बात दोहराने (Repeat) के लिए कहना। 

तेज वॉल्यूम: टीवी या मोबाइल की आवाज को सामान्य से बहुत अधिक तेज रखना। 

धीमी आवाज का भ्रम: यह महसूस करना कि सामने वाला व्यक्ति बहुत धीरे बोल रहा है। 

बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह 

डायबिटीज के मरीज निम्नलिखित उपायों से अपने सुनने की शक्ति को सुरक्षित रख सकते हैं: 

नियमित निगरानी: ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें और बार-बार जांच करें। 

सालाना हियरिंग टेस्ट: साल में कम से कम एक बार कानों की जांच (Audiometry) जरूर करवाएं। 

व्यसनों से दूरी: धूम्रपान और शराब का सेवन बंद करें, क्योंकि ये नसों की क्षति को तेज करते हैं। 

जीवनशैली में बदलाव: पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
 

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