फर्जी सर्टिफिकेट पर 3 शिक्षक सालों से उठा रहे थे सैलरी, अब चढ़े विजिलेंस के हत्थे; शिक्षा महकमे में मचा हड़कंप

Edited By Harman, Updated: 31 Jan, 2026 01:11 PM

saharsa teachers fake certificate case registered

Bihar News : बिहार के सहरसा जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ निगरानी विभाग ने शिकंजा कस दिया है। यहां तीन नियोजित शिक्षकों की इंटरमीडिएट मार्कशीट जांच में फर्जी पाई गई। अब विजिलेंस की इस कार्रवाई से शिक्षा...

Bihar News : बिहार के सहरसा जिले में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ निगरानी विभाग ने शिकंजा कस दिया है। यहां तीन नियोजित शिक्षकों की इंटरमीडिएट मार्कशीट जांच में फर्जी पाई गई। अब विजिलेंस की इस कार्रवाई से शिक्षा महकमे में खलबली मच गई है।

ऐसे खुली पोल

मिली जानकारी के अनुसार, ताजा मामला सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड का है, जहां तीन नियोजित शिक्षकों की इंटरमीडिएट मार्कशीट जांच में फर्जी पाई गई। निगरानी विभाग ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से शिक्षकों के इंटरमीडिएट प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया। जांच में पाया गया कि शिक्षिका कान्ति कुमारी ने आवेदन में इंटर का प्राप्तांक 600 और फर्स्ट डिवीजन दिखाया था, जबकि असली अंक 595 और रोल नंबर भी भिन्न था। शिक्षक राजेश ठाकुर ने अपने आवेदन में कुल अंक 570 दिखाए और फर्स्ट डिवीजन का दावा किया, जबकि बोर्ड सत्यापन में उनका वास्तविक अंक 565 पाया गया। इसी तरह मदन ठाकुर ने आवेदन में 568 अंक दिखाए, जबकि असली अंक केवल 564 थे। साथ ही ‘रिमार्क्स’ कॉलम में भी गड़बड़ी पाई गई। बलवाहाट थाने में तीनों शिक्षकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। बता दें कि यह कार्रवाई वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जाँच के क्रम में हुई।

निगरानी विभाग की चेतावनी

निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक शिक्षकों के प्रमाण पत्र की बारीकी से जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।

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