हर हर महादेव...UGC विवाद पर सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने लगाए नारे

Edited By Harman, Updated: 27 Jan, 2026 03:22 PM

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UGC Rules Controversy : देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। खासतौर पर सवर्ण वर्ग में इस पर भारी असंतोष देखा जा रहा है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से जब इस मुद्दे पर सवाल...

UGC Rules Controversy : देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। खासतौर पर सवर्ण वर्ग में इस पर भारी असंतोष देखा जा रहा है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया, तो उन्होनें धार्मिक नारे लगाने शुरु कर दिए।

UGC के सवाल पर नित्यानंद राय की प्रतिक्रिया

बिहार के वैशाली जिले में हाजीपुर स्थित कौनहारा घाट पर आयोजित गजग्राह की मूर्ति के शिलान्यास और अनावरण कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने मंत्री से UGC के नए नियमों पर सवर्ण समाज की नाराज़गी के बारे में सवाल किया। सवाल पर नित्यानंद राय सीधे जवाब देने से बचते हुए “हर-हर महादेव”, “भारत माता की जय”, “भगवान विष्णु की जय” और “हरिहरनाथ की जय” जैसे धार्मिक नारे लगाने लगे। सवाल दोहराए जाने के बावजूद उन्होंने कोई भी टिप्पणी नहीं की।

UGC के नए नियम

UGC ने 13 जनवरी 2026 को से देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के छात्र, शिक्षक के साथ जाति भेदभाव को समाप्त करने के लिए नए नियम बनाए गए है। नियमों के अनुसार, हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में 9 सदस्यों वाली समानता समिति (Equity Committee) बनाई जाएगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें, मुख्य रूप से SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ हुए किसी भी तरह के भेदभाव, उत्पीड़न या अपमान की आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकेंगे। 

नियमों को लेकर सवर्ण समाज में आक्रोश

नए नियमों का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि समिति में सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व तय नहीं किया गया है। इस कारण विरोध लगातार बढ़ रहा है और कई सवर्ण वर्ग के छात्रों और शिक्षकों ने इस पर चिंता जताई है।
 

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