दाखिल-खारिज में जानबूझकर देरी होने पर होगी सख्त कार्रवाई, विजय सिन्हा की अंचलाधिकारियों को कड़ी चेतावनी

Edited By Harman, Updated: 17 Jan, 2026 03:38 PM

strict action will be taken if delay in land mutation process  vijay process

Bihar News: बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि यदि कोई अंचल अधिकारी या कर्मी दाखिल-खारिज के मामलों को जान-बूझकर बेवजह लंबित रखता है, तो इसे सीधे तौर पर कर्तव्यहीनता और नागरिकों के अधिकारों के...

Bihar News: बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि यदि कोई अंचल अधिकारी या कर्मी दाखिल-खारिज के मामलों को जान-बूझकर बेवजह लंबित रखता है, तो इसे सीधे तौर पर कर्तव्यहीनता और नागरिकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ माना जाएगा और उस पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। 

"टाल मटोल वाली नीति अधिकारी छोड़ें"

विजय सिन्हा ने आज बयान जारी कर कहा कि बिना आपत्ति वाले मामलों में तत्काल आदेश देना अनिवार्य है, इसके बावजूद विलम्ब करना किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज समय से नहीं होने के कारण रैयतों का भू-अभिलेख अद्यतन नहीं हो पाता, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और अन्य वैधानिक सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है। यह लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के विरुद्ध गंभीर अपराध है। टाल मटोल वाली नीति सभी को छोड़ना होगा। 

बिहार में ऑनलाइन भूमि दाखिल-खारिज वादों के निष्पादन में लगातार निर्देशों के बाद भी अनियमितता और अनावश्यक विलम्ब को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। इस संबंध में सचिव जय सिंह ने सभी जिला समाहर्ता को स्पष्ट निर्देश जारी किये हैं कि दाखिल-खारिज मामलों का निष्पादन बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 एवं संशोधित नियमावली, 2020 के प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। 

बिना आपत्ति वाले मामलों में तुरंत कार्रवाई अनिवार्य

सचिव श्री सिंह द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि दाखिल-खारिज रैयतों और भू-धारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, बावजूद इसके कई अंचलों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। भूमि सुधार जन कल्याण संवाद एवं अन्य स्रोतों से यह तथ्य सामने आया है कि आपत्तिरहित मामलों को भी जान-बूझकर लंबित रखा जा रहा है, जिससे अंचल कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। पत्र में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि आम-खास सूचना जारी होने के बाद 14 दिनों की अवधि में यदि कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो अंचल अधिकारी द्वारा बिना देरी के दाखिल-खारिज का आदेश पारित किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, कई मामलों में अंचल स्तर पर स्वयं ही आधारहीन‘स्वत: आपत्ति'दर्ज कर वाद को अनावश्यक रूप से सुनवाई में डाल दिया जाता है, जो नियमों के विपरीत है। 

 बिना कारण स्वतः आपत्ति दर्ज करना नियमों के खिलाफ

विभाग द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी खाता या खेसरा से संबंधित भूमि के मामलों में ही संतुष्टि के आधार पर स्वत: आपत्ति दर्ज की जा सकती है। अन्य मामलों में बिना ठोस कारण के स्वत: आपत्ति दर्ज करना कदाचार की श्रेणी में आएगा। साथ ही यदि किसी असामाजिक तत्व द्वारा बिना आधार या बिना किसी वैधानिक हित के आपत्ति दर्ज की जाती है, तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कारर्वाई की जाएगी।

लंबित मामलों पर अधिकारियों की जवाबदेही तय 

जवाबदेही तय करते हुए विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी अंचल में अकारण लंबित दाखिल-खारिज वादों की संख्या अधिक पाई जाती है, तो संबंधित अंचल अधिकारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कारर्वाई की अनुशंसा की जाएगी। सभी जिला समाहर्ता को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से अंचल अधिकारियों को इन आदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस कदम से ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे राज्य के आम नागरिकों को शीघ्र और न्यायसंगत दाखिल-खारिज की सेवा मिल सकेगी। 
 

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