Edited By Ramanjot, Updated: 11 Feb, 2026 09:37 PM

अंडर-19 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरने वाले युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी अब एक अलग तरह की परीक्षा की तैयारी में हैं। इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उनकी तूफानी बल्लेबाजी ने भारत को खिताब दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
Vaibhav Suryavanshi: अंडर-19 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरने वाले युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी अब एक अलग तरह की परीक्षा की तैयारी में हैं। इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उनकी तूफानी बल्लेबाजी ने भारत को खिताब दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही खिलाड़ी सीबीएसई कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं। उनका एडमिट कार्ड जारी हो चुका है और परीक्षा 17 फरवरी 2026 से शुरू होगी।
क्रिकेट शेड्यूल के बीच बोर्ड एग्जाम
वैभव ने ताजपुर प्रखंड स्थित डॉ. मुक्तेश्वर सिन्हा मोडेस्ती स्कूल से दसवीं कक्षा का फॉर्म भरा था। उनका परीक्षा केंद्र समस्तीपुर के एक प्रमुख विद्यालय में तय किया गया है। स्कूल प्रशासन के अनुसार, सभी तैयारियां पूरी हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट व्यस्तताओं के चलते यह स्पष्ट नहीं है कि वे हर पेपर में उपस्थित हो पाएंगे या नहीं। अधिकारियों ने साफ किया है कि उन्हें किसी तरह की विशेष छूट नहीं दी जाएगी और वे अन्य विद्यार्थियों की तरह ही परीक्षा देंगे।
विश्व कप फाइनल में ऐतिहासिक प्रदर्शन
अंडर-19 विश्व कप फाइनल में वैभव ने 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे, जिससे उनका स्ट्राइक रेट 218 से अधिक रहा। यह प्रदर्शन यूथ वनडे फाइनल के इतिहास में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर में दर्ज हुआ। उनकी दमदार बल्लेबाजी की बदौलत टीम इंडिया ने 400 से अधिक का विशाल स्कोर खड़ा किया और मुकाबला बड़े अंतर से जीत लिया। टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का सम्मान भी मिला।
जिले में जश्न, अब पढ़ाई पर नजर
वैभव की उपलब्धि से उनके गांव और पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई थी। अब क्रिकेट के बाद शैक्षणिक मोर्चे पर उनका प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है।
खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। वैभव का सफर यह दिखाता है कि अनुशासन और समर्पण से दोनों क्षेत्रों में सफलता हासिल की जा सकती है।
खेल और शिक्षा का संतुलन बना मिसाल
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकने के बाद बोर्ड परीक्षा में बैठना युवा प्रतिभा के लिए एक अलग जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वैभव मैदान की तरह परीक्षा हॉल में भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर पाते हैं या नहीं।