तमिलनाडु से पूर्वी चंपारण पहुंचा विश्व का सबसे बड़ा 'सहस्त्र शिव लिंगम', 17 जनवरी को विराट रामायण मंदिर में होगी स्थापना

Edited By Harman, Updated: 07 Jan, 2026 11:51 AM

world largest shivling in east champaran

World Largest Shivling: तमिलनाडु में महाबलीपुरम के पट्टीकाडु से 47 दिनों पूर्व चला विश्व का सबसे बड़ा 'सहस्त्र शिव लिंगम' 2225 किलोमीटर की यात्रा पूर्ण कर बिहार में पूर्वी चंपारण के कैथवलिया पहुंच चुका है। मंदिर परिसर में 18 फीट ऊंचा पेडेस्टल एवं...

World Largest Shivling: तमिलनाडु में महाबलीपुरम के पट्टीकाडु से 47 दिनों पूर्व चला विश्व का सबसे बड़ा 'सहस्त्र शिव लिंगम' 2225 किलोमीटर की यात्रा पूर्ण कर बिहार में पूर्वी चंपारण के कैथवलिया पहुंच चुका है। मंदिर परिसर में 18 फीट ऊंचा पेडेस्टल एवं लगभग 15 फीट आधार संरचना पर 17 जनवरी 2026 को‘सहस्त्र शिव लिंगम की स्थापना होगी।  

17 जनवरी को यहां होगी स्थापना      

जानकारी हो कि इस‘सहस्त्र शिव लिंगम'को तमिलनाडु में महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में एक ही काले ग्रेनाइट पत्थर से 10 वर्षों में तराशा गया है। 33 फीट ऊँचा और 210 मीट्रिक टन (210,000 किलोग्राम) वजनी‘सहस्त्र शिव लिंगम'को 21 नवंबर 2025 को 96 चक्के वाले विशेष ट्रक पर लाद कर महाबलीपुरम से बिहार के कैथवलिया, विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था, जो मंगलवार 06 जनवरी 2026 को 47 वें दिन सफलतापूर्वक कैथवलिया पहुंचा। विनायक वेंकटरमण की कंपनी के वास्तुकार लोकनाथ के अथक परिश्रम से तैयार‘सहस्त्र शिव लिंगम'पर छोटे छोटे 1008 शिवलिंग की आकृतियां उकेरी गयीं हैं। महावीर मंदिर ट्रस्ट, पटना के तहत निर्मित किए जा रहे इस विराट रामायण मंदिर के ट्रस्टी शायन कुणाल ने बताया कि ,‘सहस्त्र शिव लिंगम'मंदिर परिसर में पहुंच चुका है। 17 जनवरी 2026 को वैदिक अनुष्ठान के साथ धर्माचार्यो द्वारा इसे 18 फीट ऊँचे पेडेस्टल और 15 फीट की आधार संरचना पर अधिष्ठापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस‘लिंगम'के प्राण प्रतिष्ठा की तिथि बाद में निर्धारित की जाएगी।'    

 जानें 'सहस्त्र शिव लिंगम' का अर्थ

आचार्य शिवानन्द ब्रह्मचारी उर्फ वांचस्पति मिश्र ने 'सहस्त्र शिव लिंगम' के महात्म्य के बारे में बताया कि‘सहस्त्र शिव लिंगम'का अर्थ है हजारों शिव लिंग, जो भगवान शिव के अनंत रूप, ब्रह्मांड की विशालता, और उनकी निराकार प्रकृति का प्रतीक है। यह‘सहस्रनाम'की तरह शिव के विभिन्न गुणों और रूपों को दर्शाता है, जहां‘सहस्र'का मतलब‘हजार'होता है और लिंग स्वयं सृजन, शक्ति और परम सत्य का प्रतीक है, जिसमें ब्रह्मांड समाया है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण बिहार के लिए यह गौरवशाली क्षण है, जब हम अपने अराध्य देवाधिदेव श्री महादेव को एक साथ‘सहस्त्र'रूप में चंपारण की पावन भूमि पर अधिष्ठापित होते हुए देख रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि पूर्व भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी और महावीर मन्दिर, पटना साहित कई संस्थानों के संथापक रहे स्व. आचार्य किशोर कुणाल ने चंपारण के कैथवलिया में विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर की स्थापना का सपना देखा था। उन्होंने अपने जीवन काल में ही भूमि अधिग्रहण के साथ मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया था। संयोगवश मंदिर निर्माण पूर्ण होने से पूर्व ही उनका निधन हो गया। पिता की मृत्यु के बाद उनके पुत्र शायन कुणाल ने निर्माण की पूरी जिम्मेवारी उठायी और निर्माण की निरन्तता को जारी रखा। इस विराट मंदिर का आकार भी बेहद भव्य होगा। यह मंदिर 1080 फीट लंबा, 580 फीट चौड़ा एवं 270 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। कुल 123 एकड़ में फैले मंदिर के परिसर में 22 मंदिर और 18 शिखरों का निर्माण होगा, जिसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


 


 

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