मौत से पहले यौन उत्पीड़न, प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें...NEET छात्रा ने 2 घंटे तक किया दरिंदों का विरोध, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे

Edited By Ramanjot, Updated: 17 Jan, 2026 04:26 PM

patna neet student death post mortem report evidence of s xual assault

Patna NEET Student Death: पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि हॉस्टल मालिक ने मामला रफा-दफा करने के लिए पैसे देने की कोशिश की। परिवार का यह भी कहना है कि मामले में तीन संदिग्धों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जिससे यह संदेह पैदा होता है...

Patna NEET Student Death: बिहार की राजधानी पटना में एक NEET उम्मीदवार छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा की मौत से पहले उसके साथ गंभीर शारीरिक और यौन हिंसा हुई थी। यह निष्कर्ष पटना पुलिस के शुरुआती दावों के बिल्कुल विपरीत हैं, जिसमें पहले यौन उत्पीड़न से इनकार किया गया था और इसे आत्महत्या या दवा की ओवरडोज़ से जोड़ने की कोशिश की गई थी। 

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में गठित मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा ने अपनी मौत से पहले डेढ़ से दो घंटे तक हमलावरों का डटकर विरोध किया। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि शरीर पर पाई गई सभी चोटें मौत से पहले की हैं, जो किसी अचानक मेडिकल इमरजेंसी नहीं बल्कि लंबे और हिंसक संघर्ष की ओर इशारा करती हैं। 

शरीर पर विरोध और संघर्ष के स्पष्ट निशान 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा की गर्दन और कंधों के आसपास गहरे अर्धचंद्राकार नाखूनों के निशान पाए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे निशान आमतौर पर तब बनते हैं जब पीड़ित खुद को बचाने के लिए पूरी ताकत से संघर्ष करता है। मेडिकल बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रा अंत तक होश में थी और अपनी जान बचाने की कोशिश कर रही थी। इसके अलावा, छाती, कंधों और पीठ पर कई खरोंच और चोटों के निशान मिले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ये चोटें एक ही वार से नहीं, बल्कि लगातार और लंबे समय तक हुए हमलों का नतीजा हैं। पीठ पर मौजूद चोटें इस बात का संकेत देती हैं कि छात्रा का शरीर किसी कठोर सतह से बार-बार टकराया, जिससे संघर्ष की अवधि घंटों तक होने की आशंका जताई गई है। 

यौन उत्पीड़न की पुष्टि, सहमति की संभावना से इनकार 

पोस्टमार्टम का सबसे गंभीर हिस्सा छात्रा के जननांगों की जांच से जुड़ा है। रिपोर्ट में ताज़ा चोटें, गहरे खरोंच के निशान, ऊतकों को नुकसान और अत्यधिक रक्तस्राव दर्ज किया गया है। मेडिकल बोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ये चोटें सहमति से बने शारीरिक संबंधों के अनुरूप नहीं हैं, बल्कि जबरन यौन उत्पीड़न की पुष्टि करती हैं। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि यदि सहमति होती, तो शरीर पर इस तरह की व्यापक और गंभीर चोटें मौजूद नहीं होतीं। चोटों की प्रकृति और संख्या को देखते हुए मेडिकल बोर्ड ने एक से अधिक लोगों की संलिप्तता की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। 

पुलिस की शुरुआती जांच पर उठे गंभीर सवाल 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पटना पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने पहले दावा किया था कि यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला, छात्रा बेहोश थी, और उसकी हालत कथित तौर पर नींद की गोलियों की ओवरडोज़ से बिगड़ी थी। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट में इन दावों की कोई पुष्टि नहीं होती।

परिवार के गंभीर आरोप

पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि हॉस्टल मालिक ने मामला रफा-दफा करने के लिए पैसे देने की कोशिश की। परिवार का यह भी कहना है कि मामले में तीन संदिग्धों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या यह फैसला सबूतों की कमी के कारण लिया गया या किसी बाहरी दबाव में। परिवार ने यह आशंका भी जताई है कि इस जघन्य अपराध में पीड़िता का कोई परिचित शामिल हो सकता है, लेकिन इस पहलू की गहराई से जांच नहीं की गई।

SIT का गठन, जांच पर बढ़ा दबाव

मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार के DGP विनय कुमार ने SP रैंक के अधिकारी की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया है। इस जांच की दैनिक निगरानी पटना रेंज के IG द्वारा की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह इनकार करना मुश्किल हो गया है कि छात्रा की मौत से पहले उसके साथ अमानवीय शारीरिक और यौन हिंसा हुई थी। अब सबकी निगाहें SIT की जांच पर टिकी हैं, जिससे पीड़िता को न्याय मिल सके और दोषियों को सख्त सजा दी जा सके।

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