Paush Purnima Kab Hai 2026: नए साल की पहली पूर्णिमा कब है? तिथि, मुहूर्त और उपाय जानें एक क्लिक में

Edited By Ramanjot, Updated: 02 Jan, 2026 10:12 PM

paush purnima kab hai 2026

नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही हिंदू पंचांग में पौष पूर्णिमा का पावन पर्व आ रहा है। यह वर्ष की पहली पूर्णिमा है, जो आध्यात्मिक शुद्धि, पुण्य प्राप्ति और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाली मानी जाती है।

Paush Purnima Kab Hai 2026: नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही हिंदू पंचांग में पौष पूर्णिमा का पावन पर्व आ रहा है। यह वर्ष की पहली पूर्णिमा है, जो आध्यात्मिक शुद्धि, पुण्य प्राप्ति और जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाली मानी जाती है। चंद्रमा की पूर्ण कला से जगमगाती यह रात्रि भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। पौष पूर्णिमा पर पवित्र स्नान, दान, व्रत और भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी की पूजा से कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है और पापों से मुक्ति मिलती है।

पूर्णिमा 2026 की तिथि (Paush Purnima Date 2026)

पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को शाम 6:53 बजे से होगी और समापन 3 जनवरी 2026 को दोपहर 3:32 बजे तक रहेगा।

उदया तिथि (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) के आधार पर पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी।
इस दिन चंद्रोदय शाम लगभग 5:28 बजे होगा।

पूर्णिमा व्रत कब है? (Purnima Vrat Kab Hai)

हालांकि कुछ भक्त व्रत के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा को ध्यान में रखते हैं, लेकिन अधिकांश परंपराओं में स्नान-दान और मुख्य पूजा उदया तिथि यानी 3 जनवरी को ही उत्तम मानी जाती है।

पौष पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

पौष पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती है। यह माघ स्नान की शुरुआत का प्रतीक है, जो माघ पूर्णिमा तक चलता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान विष्णु और चंद्रदेव की कृपा से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। यह दिन शाकंभरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, जब माता शाकंभरी की पूजा विशेष फलदायी होती है।

स्नान-दान और पूजा के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए उत्तम): 3 जनवरी को सुबह 5:25 से 6:20 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (दान-पुण्य के लिए): दोपहर 12:05 से 12:46 बजे तक।
  • चंद्रोदय समय: शाम लगभग 5:28 बजे (अर्घ्य देने का समय)।

इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करें। शाम को चंद्रमा को खीर का अर्घ्य दें।

पौष पूर्णिमा पर क्या दान करें?

पौष मास की ठंड को ध्यान में रखते हुए दान का विशेष महत्व है। अपनी क्षमता अनुसार ये दान करें:

  • चावल, दूध, शक्कर, सफेद वस्त्र, चंदन, चांदी।
  • गर्म कपड़े, कंबल, तिल, गुड़, अन्न, फल।
  • जरूरतमंदों को भोजन या शिव चालीसा का दान।

ऐसा करने से चंद्र दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सरल उपाय: जीवन में सुख-शांति के लिए

  • शाम को विष्णु-लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और मनोकामना बोलें।
  • चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय "ओम सोम सोमाय नमः" मंत्र का जाप करें।
  • घर में सत्यनारायण पूजा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

पौष पूर्णिमा का यह पावन अवसर हमें याद दिलाता है कि छोटे-छोटे पुण्य कर्म जीवन को प्रकाशमय बना सकते हैं। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने से सभी कष्ट दूर होकर सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जय श्री विष्णु! जय चंद्रदेव!
 

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