Watershed Mahotsav 2026: पानी बचा तो खेती बचेगी! वाटरशेड महोत्सव 2026 में मंत्री राम कृपाल यादव का बड़ा बयान

Edited By Ramanjot, Updated: 16 Jan, 2026 06:02 PM

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कृषि मंत्री राम कृपाल यादव द्वारा आज बामेती, पटना से राज्य स्तरीय जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत् बिहार वाटरशेड महोत्सव 2026 का शुभारम्भ किया गया।

पटना: कृषि मंत्री राम कृपाल यादव द्वारा आज बामेती, पटना से राज्य स्तरीय जलछाजन विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत् बिहार वाटरशेड महोत्सव 2026 का शुभारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार ने किया। 

इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री द्वारा पौधा रोपन किया गया। योजनाओं के लाभुक महिलाओं के द्वारा जल कलश यात्रा निकाला गया। वाटरशेड योजना के अंतर्गत 42 विकासात्मक कार्यों का शिलान्यास एवं 61 कार्यों का लोकार्पण किया गया। साथ ही, योजना की उपलब्धियों और प्रेरणादायी अनुभवों को समाहित करती ‘सफलता की कहानियाँ’ पुस्तक का विमोचन किया गया तथा वाटरशेड से जुड़े कार्यों, नवाचारों और प्रभावों को दर्शाने वाले सूचनात्मक वीडियो का प्रदर्शन भी किया गया। 

कृषि विभाग की भूमि संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित प्रगतिशील किसानों ने इस कार्यक्रम के दौरान मंच से अपने अनुभव साझा किए तथा योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों और उनसे हुए लाभों की जानकारी उपस्थित जनसमूह के साथ साझा की।

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने राज्यस्तरीय वाटरशेड महोत्सव-2026 को संबोधित करते हुए जल संरक्षण को जीवन और विकास का मूल आधार बताया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने रहीमदास जी के प्रसिद्ध दोहे “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून.....” से करते हुए कहा कि पानी ही जीवन है। इसके बिना मानव, प्रकृति और सभ्यता का अस्तित्व संभव नहीं है।

मंत्री ने कहा कि भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य। हमारी सांस्कृतिक परंपरा में नदी, तालाब, कुआँ, पेड़ और धरती को पूजनीय माना गया है। पंचतत्व-पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश पर आधारित यह दर्शन बताता है कि प्रकृति की रक्षा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत है। जल संचयन, जल संरक्षण और भूमि संरक्षण सदियों से हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि विभाग के भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट 2.0 के तहत दक्षिण बिहार के 17 जिलों एवं उत्तर बिहार के बेगूसराय को मिलाकार कुल 18 वर्षा-आश्रित जिलों में 35 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार द्वारा 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत 496 हेक्टेयर में पौधारोपण, 282 पक्के चेक डैम, 62 खेत तालाब, 361 जल संचयन तालाब, 756 आहर-पईन का जीर्णोद्धार तथा 344 कुओं का निर्माण/जीर्णोद्धार किया गया है। नये वित्तीय वर्ष में पी॰एम॰के॰एस॰वाई॰ 3.0 की शुरूआत होगी। 

मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग 9 लाख हेक्टेयर भूमि भू-क्षरण से प्रभावित है। इसे रोकने के लिए जल-जीवन-हरियाली मिशन के माध्यम से तालाबों, आहर-पईन की उड़ाही, सौंदर्यीकरण, पौधारोपण और जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त किया गया है। गंगा जल को पाइपलाइन से नालंदा, राजगीर, गया और नवादा तक पहुँचाना जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि भारत में विश्व का लगभग 4 प्रतिशत शुद्ध जल उपलब्ध है, जिसमें से 80 प्रतिशत जल का उपयोग कृषि में होता है। इसलिए कृषि के लिए जल का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री के “फोर-आर” रिड्यूस, रीयूज, रिचार्ज और रिसाइकल और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान से जल संरक्षण को नई दिशा मिली है।

मंत्री ने युवाओं और जीविका दीदियों से आह्वान किया कि वे जनभागीदारी के माध्यम से जल संचयन और संरक्षण को जनांदोलन बनाएं। उन्होंने कहा, “जल सुरक्षित तो राष्ट्र सुरक्षित।”

प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार नर्मदेश्वर लाल ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन में भूमि की भूमिका जन्म से लेकर मृत्यु तक अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मृदा की ऊपरी परत को हमारी अमूल्य पूंजी बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि मृदा की उर्वर ऊपरी परत के संरक्षण हेतु ठोस प्रयास किए जाने चाहिए तथा इसके दीर्घकालीन भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महोत्सव के माध्यम से मृदा की ऊपरी परत के क्षरण को रोकने और भूमि संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रभावी एवं महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।

इस अवसर पर मनोज कुमार, विशेष सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, नन्द किशोर साह, विशेष सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार एस. चन्द्रशेखर, मुख्य वन संरक्षक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, बिहार, शैलेन्द्र कुमार, विशेष सचिव, कृषि विभाग, बिहार, मि.वामिक अली, तकनीकी विशेषज्ञ, भूूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, शम्स जावेद अंसार, संयुक्त सचिव, पंचायती राज विभाग, बिहार, राधा रमन, निदेशक, भूमि संरक्षण, पटना, विनय कुमार सिन्हा, अधीक्षक अभियंता, जल संसाधन विभाग, बिहार सहित बड़ी संख्या किसान एवं विभाग के अन्य पदाधिकारीगण भी उपस्थित थे।

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