Digital Gold : मोबाइल ऐप से ₹1 में सोना खरीदना कितना सुरक्षित? जानें डिजिटल गोल्ड के पीछे का कड़वा सच

Edited By Ramanjot, Updated: 14 Feb, 2026 04:25 PM

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Digital Gold : डिजिटल गोल्ड ₹1 जैसी छोटी राशि से सोने में निवेश की सुविधा तो देता है, लेकिन यह SEBI या RBI के दायरे में नहीं आता, जो इसे जोखिम भरा बनाता है

Digital Gold : भारत में सोने को पारंपरिक रूप से निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता रहा है। पहले लोग आभूषणों या सिक्कों के लिए ज्वैलरी शॉप के चक्कर काटते थे, लेकिन अब दौर 'डिजिटल गोल्ड' का है। मोबाइल ऐप के जरिए महज ₹1 में 24 कैरेट सोना खरीदने की सुविधा ने युवाओं और छोटे निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि, रेगुलेशन की कमी और छिपे हुए शुल्क इस चमक को फीका भी कर सकते हैं। आइए जानते हैं डिजिटल गोल्ड का पूरा सच। 

क्या होता है Digital Gold ? 

डिजिटल गोल्ड का अर्थ है ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से 99.9% शुद्ध (24 कैरेट) सोना खरीदना। जब आप डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, तो वह आपके घर के बजाय एक सुरक्षित और बीमाकृत वॉल्ट (Safe Vault) में रखा जाता है। निवेशक जब चाहें इसे मौजूदा बाजार दर पर बेच सकते हैं या मेकिंग चार्ज देकर फिजिकल डिलीवरी (सिक्का या बार) मंगवा सकते हैं। 

डिजिटल गोल्ड के फायदे और आकर्षण 

किफायती निवेश: इसमें ₹10 या ₹100 जैसी छोटी राशि से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। 

शुद्धता और सुरक्षा: प्लेटफॉर्म 99.9% शुद्धता की गारंटी देते हैं और सोने के चोरी होने का डर नहीं रहता। 

लिक्विडिटी: जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत ऐप पर बेचकर पैसा सीधे बैंक खाते में लिया जा सकता है। 
 

जानें छिपे हुए जोखिम और चुनौतियां 

डिजिटल गोल्ड जितना सरल दिखता है, इसके पीछे उतने ही तकनीकी पेंच हैं: 

रेगुलेशन का अभाव: सबसे बड़ी चिंता यह है कि डिजिटल गोल्ड वर्तमान में RBI या SEBI द्वारा पूरी तरह रेगुलेटेड नहीं है। यह पूरी तरह प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर निर्भर है। 

कीमत का अंतर (Spread): खरीद और बिक्री की कीमत में 3% से 6% तक का अंतर होता है। यानी खरीदते ही आपका निवेश कागजों पर घाटे में आ जाता है। 

होल्डिंग पीरियड: अधिकांश प्लेटफॉर्म 5 साल जैसी निश्चित अवधि के बाद सोने को फिजिकल रूप में लेने या बेचने का दबाव डालते हैं। 

क्रेडिट कार्ड से खरीदारी: फायदे से ज्यादा नुकसान? 

लोग रिवॉर्ड पॉइंट्स के लालच में क्रेडिट कार्ड से डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह घाटे का सौदा हो सकता है: 

कैश एडवांस चार्ज: कई बैंक इसे कैश ट्रांजैक्शन मानकर हाई इंटरेस्ट रेट वसूलते हैं। 

ब्याज का बोझ: यदि क्रेडिट कार्ड बिल समय पर नहीं चुकाया गया, तो 30-40% सालाना ब्याज लग सकता है, जो सोने से मिलने वाले मुनाफे को खत्म कर देगा। 

RBI का रुख और विशेषज्ञों की सलाह 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को डिजिटल गोल्ड की 'मिस-सेलिंग' को लेकर आगाह किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश चाहते हैं, तो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या गोल्ड ETF जैसे रेगुलेटेड विकल्पों पर विचार करना बेहतर है।

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