Makar Sankranti 2026 Date: 14 या 15 जनवरी, कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति?  दूर कर लें कंफ्यूजन

Edited By Ramanjot, Updated: 12 Jan, 2026 06:43 PM

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नए साल की शुरुआत के साथ ही Sankranti Festival 2026 को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। खासकर मकर संक्रांति की तारीख को लेकर इस बार असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

Makar Sankranti 2026 Date: नए साल की शुरुआत के साथ ही Sankranti Festival 2026 को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। खासकर मकर संक्रांति की तारीख को लेकर इस बार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई लोग 14 जनवरी को पर्व मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ 15 जनवरी को भी पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने की बात कर रहे हैं।

Makar Sankranti 2026 का सही दिन क्या है?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी खगोलीय घटना को मकर संक्रांति कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, सूर्य के राशि परिवर्तन से 8 घंटे पहले और 8 घंटे बाद तक का समय पुण्यकाल माना जाता है। चूंकि सूर्य का संक्रमण 14 जनवरी की दोपहर में हो रहा है, इसलिए मुख्य रूप से मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को ही मनाई जाएगी।

हालांकि, जो लोग Udaya Tithi (उदय तिथि) को मानते हैं, वे 15 जनवरी को भी स्नान-दान और धार्मिक कार्य करेंगे। इसी दिन से एक महीने से चला आ रहा Kharmas भी समाप्त हो जाएगा और शुभ कार्यों की शुरुआत संभव होगी।

Makar Sankranti Rituals: ‘तिलों-तिलों बहबो’ का सांस्कृतिक महत्व

बिहार और मिथिलांचल क्षेत्र में मकर संक्रांति की एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। इस दिन लोग तिल, चावल और गुड़ देते समय कहते हैं — ‘तिलों-तिलों बहबो’।

इसके पीछे गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक अर्थ छिपे हैं—

परिवार और वंश वृद्धि की कामना

यह वाक्य जीवन में सुख-समृद्धि और पीढ़ियों की निरंतरता की कामना को दर्शाता है। जैसे किसान खेत में बीज बोकर अन्न बढ़ाता है, वैसे ही घर-परिवार के विस्तार और जिम्मेदारियों के निर्वहन की भावना इससे जुड़ी है।

दिनों के बढ़ने का संकेत

Sun Transit Capricorn के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन से दिन धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं, ठंड कम होने लगती है और वातावरण में गर्माहट का एहसास होने लगता है।

क्यों बदल रही है मकर संक्रांति की तारीख?

खगोलीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहों की गति में सूक्ष्म बदलाव के कारण हर 70–75 वर्षों में मकर संक्रांति की तारीख आगे खिसक जाती है। पहले यह पर्व 13 या 14 जनवरी को मनाया जाता था, लेकिन अब यह 14 और 15 जनवरी के बीच आ गया है।

Makar Sankranti 2026: परंपरा, स्नान और दान का विशेष दिन

मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, खिचड़ी का सेवन और तिल-गुड़ का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी तक सूर्य का प्रभाव बढ़ता चला जाता है और कड़ाके की ठंड से राहत मिलने लगती है।
 

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