Edited By Ramanjot, Updated: 05 Jan, 2026 06:02 PM

सनातन धर्म में माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। यह पर्व विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है, जो सुख-समृद्धि और बाधाओं को दूर करने वाले माने जाते हैं।
Sakat Chauth 2026: सनातन धर्म में माघ मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। यह पर्व विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है, जो सुख-समृद्धि और बाधाओं को दूर करने वाले माने जाते हैं। विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना से यह व्रत रखती हैं। इस दिन को तिलकुट चौथ, माघी चौथ और वक्रतुंड चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, सकट चौथ पर विधिपूर्वक गणेश पूजन और उपवास करने से परिवार के सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता मिलती है। इस वर्ष यह पर्व विशेष रूप से शुभ है क्योंकि यह मंगलवार को पड़ रहा है, जिसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है – जो सभी संकष्टी चतुर्थियों में सबसे फलदायी मानी जाती है।
Sakat Chauth 2026 Date & Tithi: कब मनाई जाएगी सकट चौथ?
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 6 जनवरी 2026 सुबह 8:01 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 7 जनवरी 2026 सुबह 6:52 बजे
Sakat Chauth 2026 Chandroday Time: चंद्रोदय का सही समय: रात 8:54 बजे (दिल्ली और प्रमुख शहरों में लगभग यही समय, स्थानीय अंतर हो सकता है)
उदया तिथि और चंद्रोदय को ध्यान में रखते हुए सकट चौथ 6 जनवरी मंगलवार को मनाई जाएगी। व्रत चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद ही पूर्ण होता है।
Sakat Chauth 2026 Puja Muhurat: शुभ योग और पूजा का समय
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:48 बजे
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह से दोपहर तक
- प्रदोष काल: शाम 4:09 से 6:39 बजे तक (पूजा के लिए उत्तम)
सकट चौथ का महत्व
यह व्रत मुख्यतः संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए रखा जाता है। उत्तर भारत में इसे सकट चौथ के नाम से, जबकि महाराष्ट्र में लंबोदर संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। भगवान गणेश की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति आती है। माताएं सकट माता की भी आराधना करती हैं, जो बच्चों की रक्षक हैं।
Sakat Chauth Puja Vidhi: ऐसे करें पूजन
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। पंचामृत स्नान, सिंदूर-घी का लेप, जनेऊ, रोली, चंदन, दूर्वा, फूल चढ़ाएं।
- धूप-दीप जलाएं और तिल-गुड़ के लड्डू, मोदक या तिलकुट का भोग लगाएं।
- ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। गणेश अथर्वशीर्ष या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।
- व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- शाम को चंद्रोदय पर चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
- अर्घ्य के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत पारण करें।
Sakat Chauth Vrat Rules: उपवास कैसे रखें?
सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास। निर्जला या फलाहार कर सकते हैं, लेकिन नमक से परहेज करें।