Edited By Ramanjot, Updated: 12 Feb, 2026 06:40 PM

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अनुसार, 3 नवंबर 2025 को जारी गजट अधिसूचना के साथ आयोग अस्तित्व में आ गया है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट मई 2027 तक आने की संभावना है।
8th pay Commission : केंद्र सरकार ने देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th pay Commission) के गठन पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है। राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की कि सरकार ने 3 नवंबर 2025 को संकल्प के माध्यम से आयोग को अधिसूचित कर दिया है। यह कदम आगामी वर्षों में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे और पेंशन में व्यापक संशोधन का मार्ग प्रशस्त करेगा।
आयोग का दायरा और लाभार्थी
अधिसूचना के अनुसार, यह आयोग केंद्रीय सिविलियन कर्मचारियों के साथ-साथ रक्षा बलों, अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों, भत्तों और पेंशन की समीक्षा करेगा। इसके दायरे में निम्नलिखित शामिल होंगे:
- केंद्रीय औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी।
- रक्षा कर्मी और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी।
- सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के अधिकारी/कर्मचारी।
- ऑडिट एवं अकाउंट्स विभाग और विनियामक निकायों (RBI को छोड़कर) के सदस्य।
मई 2027 तक आएगी रिपोर्ट
सरकार ने आयोग को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए 18 महीने का समय दिया है। 3 नवंबर 2025 से गणना करने पर, आयोग की रिपोर्ट मई 2027 तक आने की प्रबल संभावना है। रिपोर्ट जमा होने के बाद, केंद्र सरकार सिफारिशों पर विचार करेगी और उन्हें लागू करने की तिथि व प्रक्रिया तय करेगी।
टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) और वित्तीय प्रभाव
वित्त राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि आयोग के गठन के साथ ही उसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी कर दिए गए हैं। आयोग अपनी कार्यप्रणाली और समीक्षा की पद्धति स्वयं निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस संशोधन से पड़ने वाले वित्तीय बोझ का कोई आकलन नहीं किया है, क्योंकि यह पूरी तरह से आयोग की अंतिम सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
लंबे समय से लंबित थी मांग
7वें वेतन आयोग के गठन के लगभग एक दशक बाद हुए इस फैसले से उन पेंशनभोगियों और सेवारत कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जो मुद्रास्फीति और जीवन निर्वाह लागत के आधार पर वेतन संशोधन की मांग कर रहे थे। सांसदों के सवालों के जवाब में सरकार ने पेंशन रिवीजन और पुराने पेंशनभोगियों की पात्रता पर भी स्थिति स्पष्ट की है।