इस शख्स ने 55 बार मनाई सुहागरात! अंधेरी रात में नई नवेली दुल्हन के कमरे में घुसता और फिर करता...

Edited By Ramanjot, Updated: 05 Jan, 2026 11:37 AM

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Jiyaram Story: जीयाराम किसी हथियार या जबरदस्ती का सहारा नहीं लेता था, बल्कि वह समाज की परंपराओं और भरोसे का फायदा उठाता था। वह उन घरों को निशाना बनाता जहां नई-नवेली दुल्हन पहली बार मायके आई होती घर के पुरुष सदस्य काम के सिलसिले में बाहर हों, यह वह...

Jiyaram Story: राजस्थान की वीर भूमि जहां शौर्य और बलिदान की गाथाएं गूंजती हैं, वहीं इसी रेतीली धरती पर एक ऐसा काला अध्याय भी दर्ज है जिसने समाज के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई। यह कहानी है बाड़मेर जिले के कुख्यात अपराधी जीयाराम की, जिसे सीमावर्ती इलाकों में ‘कुंवारे जंवाई राजा’ के नाम से जाना जाता था। इस व्यक्ति ने 55 बार सुहागरात मनाई। रात के अंधेरे में नई नवेली दुल्हन के कमरे में घुसता और फिर सुबह होते ही वह घर से गायब हो जाता। 

कैसे बना ‘कुंवारे जंवाई राजा’? 

राजस्थान के बाड़मेर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जीयाराम (Jiyaram)ने रिश्तों की पवित्रता को हथियार बनाकर अपराध किए। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसने 55 से ज्यादा घरों में खुद को दामाद बताकर घुसपैठ की और रातों-रात परिवारों की खुशियां लूट लीं। 

जीयाराम का खौफनाक Modus Operandi 

जीयाराम किसी हथियार या जबरदस्ती का सहारा नहीं लेता था, बल्कि वह समाज की परंपराओं और भरोसे का फायदा उठाता था। वह उन घरों को निशाना बनाता जहां नई-नवेली दुल्हन पहली बार मायके आई होती घर के पुरुष सदस्य काम के सिलसिले में बाहर हों, यह वह पहले से सुनिश्चित करता। बिजली की कमी और घूंघट प्रथा का फायदा उठाकर खुद को दामाद बताकर घर में दाखिल हो जाता। परिवार के बुजुर्ग उसे असली जंवाई समझकर सम्मानपूर्वक स्वागत करते थे। 

रात में धोखा, सुबह लूट 

रात के समय वह दुल्हन के कमरे में पति बनकर पहुंचता और सुबह होने से पहले सोने-चांदी के गहने नकदी और कीमती सामान लेकर फरार हो जाता। सुबह जब सच्चाई सामने आती तो परिवार बदनामी और सामाजिक डर के कारण चुप्पी साध लेता। कई पीड़ित महिलाएं जीवनभर यह दर्द किसी से साझा नहीं कर सकीं। 

पुलिस रिकॉर्ड में शातिर हिस्ट्रीशीटर 

राजस्थान पुलिस के दस्तावेजों के अनुसार, जीयाराम के खिलाफ पहला केस 1988 में चौहटन थाने में दर्ज हुआ। चोरी और छेड़छाड़ के 17 से ज्यादा मामले दर्ज थे। 1990 से 1996 के बीच उसने सिणधरी, समदड़ी और धोरीमन्ना इलाकों में आतंक फैलाया। वह कई बार जेल गया, लेकिन रिहा होने के बाद फिर अपराध करने लगा। 

2016 में हुई मौत, लेकिन खौफ आज भी जिंदा 

साल 2016 में फेफड़ों की गंभीर बीमारी के कारण इलाज के दौरान जीयाराम की मौत हो गई। हालांकि, उसकी मौत के बाद भी सीमावर्ती गांवों में उसकी डरावनी कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं। यह मामला बताता है कि कैसे अंधविश्वास सामाजिक संकोच और पुरानी परंपराएं अपराधियों के लिए हथियार बन सकती हैं। यह कहानी सिर्फ एक अपराधी की नहीं, बल्कि समाज को सतर्क करने वाली चेतावनी भी है।
 

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